पेट्रोल में और मिलेगा इथेनॉल, BIS ने जारी किए E22-E30 फ्यूल के स्टैंडर्ड

भारत अब E20 से आगे बढ़कर ज्यादा इथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल्स की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. BIS ने E22, E25, E27 और E30 फ्यूल के लिए नए स्टैंडर्ड को जारी कर दिया है. इससे भारत में हाई इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले फ्यूल्स को औपचारिक मंजूरी मिल गई है. बीआईएस के इस नोटिफिकेशन को एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है.

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BIS ने E22 से E30 तक फ्यूल के लिए स्टैंडर्ड जारी किया है. (Photo: ITG) BIS ने E22 से E30 तक फ्यूल के लिए स्टैंडर्ड जारी किया है. (Photo: ITG)

चेतन भूटानी

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने भारत में हाई इथेनॉल ब्लेंड फ्यूल्स के लिए नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. भारत में E20 के बाद आगे बढ़ते हुए बीआईएस ने E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल के लिए आधिकारिक फ्यूल स्पेसिफिकेशन तय कर दिए गए हैं. इसे भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम और अल्टरनेटिव फ्यूल अपनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है. 

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सरकार ने 15 मई 2026 को एक नोटिफिसकेशन जारी किया था. इस नोटिफिकेशन के मुताबिक, BIS ने E22, E25, E27 और E30 फ्यूल के लिए मानक जारी कर दिए गए हैं. इससे भारत में ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल के इस्तेमाल को औपचारिक मंजूरी मिल गई है.

ये नोटिफिकेशन ऐसे वक्त पर आया है, जब भारत इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रहा है. इससे कच्चे तेल के आयात को कम करने, प्रदूषण घटाने और घरेलू शुगर तथा बायोफ्यूल इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया जा सकेगा. इस फैसले का ऑल इंडिया डिस्टलरी एसोसिएशन ने स्वागत किया है. 

महत्वपूर्ण है इस नोटिफिकेशन की टाइमिंग 

एआईडीए ने इसे भारत के इथेनॉल प्रोग्राम के लिए महत्वपूर्ण और समय पर लिया गया फैसला बताया है. AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने बताया, 'E22 से E30 फ्यूल्स के लिए BIS मानकों का जारी होना सिर्फ एक टेक्निकल नोटिफिकेशन नहीं है, बल्कि ये दूरदर्शी कदम है.'

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इंडस्ट्री बॉडी ने खास तौर पर E25 फ्यूल स्टैंडर्ड का स्वागत किया है. उनका मानना है कि इससे बाजार में मौजूद अतिरिक्त चीनी और इथेनॉल उत्पादन क्षमता को इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी. हालांकि AIDA का कहना है कि देश को अब E85 और E100 जैसे और ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल्स की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) अहम भूमिका निभा सकते हैं. 

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विजेंद्र सिंह ने कहा, 'फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने, एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने, एमिशन कम करने और घरेलू बायोफ्यूल्स के लिए टिकाऊ बाजार तैयार करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.' नए BIS मानकों से ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और बायोफ्यूल उत्पादकों को रेगुलेटरी स्पष्टता मिलेगी. माना जा रहा है कि भारत अब इथेनॉल आधारित मोबिलिटी के अगले चरण की तैयारी कर रहा है.

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