Ethanol Blending E21 & E25 Petrol: पेट्रोल की हर बूंद अब सिर्फ तेल नहीं रह गई है. उसमें पॉलिटिक्स है, खेती है, विदेशी बाजार का दबाव है और कच्चे तेज का भाव है. सरकार अब ऐसा फॉर्मूला तैयार कर रही है, जिसमें आने वाले कुछ सालों में आपकी गाड़ी के टैंक में पेट्रोल से ज्यादा चर्चा इथेनॉल की होगी. पहले E10 आया, फिर E20 की एंट्री हुई और अब बात सीधे E25 तक पहुंच गई है. यानी गाड़ी वही रहेगी, लेकिन उसके पेट्रोल की केमिस्ट्री बदल जाएगी.
बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए फ्यूल बचाने और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की बात कही. इसी बीच खबर सामने आई है कि सरकार अब पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के अगले स्टपे पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भारत में E21 और फिर E25 ब्लेंडेड पेट्रोल लाने की तैयारी चल रही है.
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि, केंद्र सरकार 2027 तक E21 पेट्रोल लॉन्च करने का रोडमैप तैयार कर रही है. इसका मतलब होगा कि पेट्रोल में 21 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाएगा. इसके बाद 2029 तक E25 ब्लेंडिंग का टार्गेट रखा जा सकता है. हालांकि सरकार इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे लागू करना चाहती है ताकि ऑटोमोबाइल कंपनियों और ग्राहकों को किसी तरह की परेशानी न हो.
जानकारी के मुताबिक, सरकार पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत तक तय कर सकती है. यानी भविष्य में E25 से आगे जाने की फिलहाल कोई योजना नहीं दिख रही है. सरकार का मानना है कि इससे फ्यूल बचत और क्रूड ऑयल आयात में कमी लाने में मदद मिलेगी, साथ ही गाड़ियों के इंजन पर ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ेगा.
सरकार इस बदलाव को एकदम से लागू नहीं करना चाहती. सूत्रों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी ताकि वाहन निर्माता कंपनियां अपने इंजन, सप्लाई चेन और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को समय रहते तैयार कर सकें. सरकार वाहन कम्पैटिबिलिटी और माइलेज से जुड़ी चिंताओं को भी गंभीरता से देख रही है. क्योंकि हाल ही में E20 फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर कई लोगों ने वाहनों के माइलेज गिरने, मेंटनेंस बढ़ने और जरूरी कंपोनेंट्स के खराब होने की शिकायत भी की थी.
भारत लंबे समय से कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर रहा है. ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण सरकार अब घरेलू विकल्पों पर ज्यादा जोर दे रही है. इथेनॉल ब्लेंडिंग को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इससे पेट्रोल की खपत कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी.
सरकारी अनुमान के मुताबिक, 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल करने से भारत हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत कर पा रहा है. मार्च में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, "संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी बहुत काम आ रही है. पिछले 10-11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसके ब्लेंडिंग पर बहुत बढ़िया काम हुआ है. एक दशक पहले तक पेट्रोल में केवल 1-2% तक इथेनॉल ब्लेंडिंग करते थें. लेकिन अब हम पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है."
इसके साथ ही करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद मिली है. भारत पहले ही तय समय से पहले E20 पेट्रोल लागू कर चुका है. अब सरकार अगले चरण की तैयारी में जुटी हुई है, लेकिन इस बार ज्यादा संतुलित और सावधानी भरा तरीका अपनाया जाएगा.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क