पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का पहला चरण शुक्रवार को पूरा हो गया. भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के रथ शुक्रवार दोपहर श्री गुंडिचा मंदिर पहुंच गए. गुरुवार को शुरू हुई रथ यात्रा के दौरान तीनों रथ निर्धारित समय तक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके थे. इसके बाद परंपरा के अनुसार सूर्यास्त होने पर रथ खींचने की प्रक्रिया रोक दी गई थी और शुक्रवार सुबह इसे फिर से शुरू किया गया. (Photo- PTI)
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि परंपरा के अनुसार तीनों देवताओं की प्रतिमाएं शुक्रवार रात तक अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहेंगी. इसके बाद शनिवार शाम विशेष अनुष्ठान के साथ उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा. मान्यता है कि श्री गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का जन्मस्थान है. वहीं, नौ दिवसीय रथ यात्रा के समापन की शुरुआत करने वाली बहुदा यात्रा 24 जुलाई को निकाली जाएगी.
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गुरुवार को रथ यात्रा के दौरान देवताओं की प्रतिमाओं को श्रीमंदिर के गर्भगृह से रथों तक लाने की रस्म में देरी हुई, जिसके कारण रथ समय पर नहीं चल सके. परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद रथ नहीं खींचे जाते, इसलिए शाम करीब सात बजे यात्रा रोक दी गई थी. भगवान बलभद्र का तलध्वज रथ शाम 5:10 बजे निर्धारित समय से काफी देर बाद चला और करीब 700 मीटर की दूरी तय कर मार्केट चौक पर रुक गया. (Photo- PTI)
देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ लगभग 400 मीटर चलकर मरीचिकोट चौक पर ठहर गया, जबकि भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ केवल कुछ गज ही आगे बढ़ सका और श्रीमंदिर के मुख्य द्वार के पास ही रुक गया. रातभर तीनों देवताओं की प्रतिमाएं रथों पर विराजमान रहीं. इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दर्शन किए. मंदिर प्रशासन ने बताया कि पूरी रात दर्शन बंद नहीं किए गए और बड़ी संख्या में भक्तों ने रथों पर विराजमान भगवान के दर्शन किए. (Photo-PTI)
पुरी के गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दिव्यसिंह देव ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि रथों का अगले दिन गंतव्य तक पहुंचना कोई असामान्य बात नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि रथ यात्रा एक ही दिन में पूरी नहीं हो सकी और अगले दिन रथ खींचे गए. इस बार भी सूर्यास्त होने के कारण यात्रा रोकनी पड़ी थी. शुक्रवार सुबह हजारों श्रद्धालु फिर से ग्रैंड रोड पर जुटे और 'जय जगन्नाथ' तथा 'हरि बोल' के जयघोष के साथ रथों को खींचना शुरू किया. सबसे पहले सुबह करीब 9:45 बजे भगवान बलभद्र के रथ को आगे बढ़ाया गया. (Photo- PTI)
सबसे पहले तलध्वज रथ श्री गुंडिचा मंदिर पहुंचा. इसके बाद देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ मंदिर के सामने स्थित सारधाबली मैदान पहुंचा. इसके साथ ही नौ दिवसीय रथ यात्रा का पहला चरण संपन्न हो गया. इस वर्ष रथ यात्रा के दौरान एक अनोखा दृश्य भी देखने को मिला. भगवान जगन्नाथ पहली बार अपने पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' के बिना भक्तों को दर्शन देते नजर आए. एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि लगातार बारिश के कारण ताहिया भीगकर काफी भारी हो गया था, इसलिए उसे हटा दिया गया. (Photo- PTI)
रथ यात्रा के दौरान गुरुवार को भीड़ बढ़ने और उमस भरे मौसम के बीच दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दोनों मृतकों के प्रति शोक व्यक्त किया और उनके परिजनों के प्रति संवेदना जताई. हालांकि राज्य सरकार ने इस घटना को भगदड़ मानने से इनकार किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि एक बुजुर्ग श्रद्धालु की अत्यधिक भीड़ के बीच मौत हुई, जबकि दूसरे श्रद्धालु की हार्ट अटैक से जान गई. (Photo-PTI)
रथ यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सौमेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि 19 आईपीएस अधिकारियों सहित करीब 13 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. इसके अलावा सीआरपीएफ, बीएसएफ, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की 15 कंपनियां भी विभिन्न स्थानों पर तैनात रहीं. ग्रैंड रोड और आसपास के इलाकों में 473 एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन-रोधी प्रणाली से निगरानी की गई. भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और ओडिशा पुलिस की संयुक्त समुद्री गश्त के साथ त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) भी तैनात किए गए थे. (Photo-PTI)