जहां उम्मीद कम थी, वहीं हुआ चमत्कार, इजरायली तकनीक से नरसिंहपुर में खड़ा हुआ 70 एकड़ का आमों का साम्राज्य, अब पहुंचा दुबई- लंदन

नरसिंहपुर जिले के छेना कछार गांव में किसान विजय पाल सिंह पटेल ने विदेशी तकनीक से आम की बागवानी कर सफलता की मिसाल पेश की है. 70 एकड़ में फैले इस बाग में केसर और जम्बो केसर आम उगाए जा रहे हैं. इजरायली अल्ट्रा हाई डेंसिटी तकनीक से तैयार इन आमों का निर्यात दुबई और लंदन तक किया जा चुका है.

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कम उपजाऊ जमीन पर खड़ा हुआ 70 एकड़ का आधुनिक आम बाग. (Photo: ITG) कम उपजाऊ जमीन पर खड़ा हुआ 70 एकड़ का आधुनिक आम बाग. (Photo: ITG)

अनुज ममार

  • नरसिंहपुर ,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:21 PM IST

कहते हैं खेती में सफलता सिर्फ जमीन से नहीं, बल्कि सोच से मिलती है. मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक किसान ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. जिस जमीन को पहले कम उपजाऊ माना जाता था, वहां आज आम की बागवानी लाखों का कारोबार कर रही है और यहां उगाए गए आम विदेशों तक पहुंच रहे हैं. नरसिंहपुर जिले के छेना कछार गांव में फैला यह आम का बगीचा किसी कृषि प्रयोगशाला जैसा दिखाई देता है. करीब 70 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस बगीचे में आम की कई उन्नत किस्मों की खेती की जा रही है. नदी किनारे की जिस जमीन को खेती के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था, उसी जमीन पर आज हजारों आम के पेड़ लगाए गए हैं और यह क्षेत्र किसानों के लिए मिसाल बन चुका है.

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इस बगीचे को तैयार करने वाले किसान विजय पाल सिंह पटेल मूल रूप से छिंदवाड़ा जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग हटकर बागवानी को अपनाया और इजरायली की अल्ट्रा हाई डेंसिटी तकनीक से आम के पौधे लगाए. इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें कम जगह में अधिक पौधे लगाए जाते हैं, जिससे उत्पादन भी बढ़ता है और मुनाफा भी बेहतर होता है.

किसान की सोच बनी सफलता की मिसाल

विजय पाल सिंह पटेल ने इस बगीचे में केसर आम की खेती पर विशेष ध्यान दिया. मध्य प्रदेश में केसर आम की खेती कम देखने को मिलती है, लेकिन यहां जम्बो केसर आम के करीब छह हजार पौधे लगाए गए हैं. इस प्रजाति का एक आम डेढ़ से दो किलो तक वजन का हो सकता है, जो इसे बाजार में खास बनाता है.

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करीब दो वर्ष पहले इस बगीचे में तैयार आमों का निर्यात दुबई और लंदन तक किया जा चुका है. इससे यह साबित होता है कि यहां की फसल केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रही है. उत्पादन के साथ-साथ इस बगीचे में गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. आम के फलों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष बैग लगाए जाते हैं, जिसे बैगिंग तकनीक कहा जाता है. इस तकनीक से फलों का रंग और चमक बेहतर होती है और उनकी गुणवत्ता भी बनी रहती है.

कम उपजाऊ जमीन पर खड़ा हुआ 70 एकड़ का आधुनिक आम बाग

इसके अलावा बैगिंग तकनीक की मदद से फलों को कीटों से सुरक्षा मिलती है और दवाओं का असर सीधे फल पर नहीं पड़ता. इससे आम अधिक सुरक्षित और बाजार के लिए उपयुक्त बनते हैं. किसान विजय पाल सिंह पटेल की यह पहल अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है. परंपरागत खेती से हटकर तकनीक आधारित बागवानी ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच भी बनाई है. नरसिंहपुर का यह आम बाग अब इस बात का उदाहरण बन गया है कि सही तकनीक और सोच के साथ खेती को भी वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है.
 

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