फलदार पेड़ों से अच्छी और लगातार पैदावार पाने के लिए सिर्फ खाद और पानी ही नहीं, बल्कि समय पर की गई छंटाई (pruning) भी उतनी ही जरूरी होती है. कई बागवानी विशेषज्ञ मानते हैं कि गर्मियों का समय कुछ खास fruit trees के लिए हल्की छंटाई करने का सबसे सही मौका होता है, क्योंकि इस दौरान पेड़ की अनावश्यक बढ़त को नियंत्रित करके ऊर्जा को सीधे फल उत्पादन की दिशा में लगाया जा सकता है.
गर्मी के मौसम में कई पेड़ों में तेजी से बढ़ने वाली पतली और अनचाही शाखाएं विकसित हो जाती हैं, जिन्हें water sprouts कहा जाता है. ये शाखाएं पेड़ की ऊर्जा को बेवजह खर्च करती हैं और फल बनने की प्रक्रिया को कमजोर कर देती हैं. ऐसे में इनकी छंटाई करने से पेड़ का संतुलन बेहतर होता है और उसका ढांचा अधिक मजबूत बनता है. इसके साथ ही पेड़ के अंदर हवा और सूरज की रोशनी आसानी से पहुंचती है, जिससे फंगल इंफेक्शन और कीटों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार आड़ू (Peach), सेब (Apple), नाशपाती (Pear), चेरी (Cherry), आलूबुखारा (Plum), खुबानी (Apricot) और नेक्टरिन (Nectarine) जैसे फलदार पेड़ों में गर्मियों की हल्की छंटाई खास तौर पर लाभदायक मानी जाती है. इन पेड़ों में इस समय कटाई करने से घाव जल्दी भर जाते हैं और पेड़ पर ज्यादा तनाव नहीं आता, जिससे उनकी सेहत बनी रहती है और अगली फसल बेहतर होती है.
छंटाई करते समय सबसे पहले सूखी, टूटी और रोगग्रस्त शाखाओं को हटाना चाहिए, क्योंकि ये पेड़ के लिए नुकसानदायक होती हैं. इसके बाद उन टहनियों को हटाया जाता है जो अंदर की ओर बढ़ रही हों या एक-दूसरे से टकरा रही हों. ऐसी शाखाएं न सिर्फ पेड़ का आकार बिगाड़ती हैं बल्कि फल बनने की जगह भी कम कर देती हैं. इसके अलावा बहुत तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रही पतली शाखाओं को भी नियंत्रित करना जरूरी होता है ताकि पेड़ का संतुलन बना रहे.
इन बातों का रखें ख्याल
हालांकि छंटाई करते समय सबसे बड़ी सावधानी यही रखनी चाहिए कि बहुत ज्यादा कटाई न हो. अत्यधिक pruning से पेड़ कमजोर हो सकता है और उसकी फल देने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है इसलिए हमेशा हल्की और नियंत्रित छंटाई ही करनी चाहिए, ताकि पेड़ पर अनावश्यक दबाव न पड़े.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क