
किसान चाची यानी राजकुमारी देवी बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं. समाज के बनाए गए बंधनों को तोड़ कर उन्होंने सबसे पहले खेती की शुरुआत की. खुद की उगाए आम, नींबू ,कटहल से अचार बनाना शुरू किया. फिर इसे स्थानीय बाजारों में बेचने लगीं. जब उनके बनाए हुए अचारों की डिमांड बढ़ी तो अपनी जैसी कई महिलाओं को साथ जोड़ कर उन्हें रोजगार दिया है. आज वह पूरे देश में किसान चाची नाम से लोकप्रिय हैं.
समाज और परिवार ने किया था विरोध
राजकुमारी देवी को भारत सरकार पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित कर चुकी हैं. मुजफ्फरपुर के सरैया ब्लॉक में रहने वाली किसान चाची ने सबसे पहले अपने जमीन पर खेती की शुरुआत की. समाज और परिवार का विरोध भी उनके हौसले को डिगा नहीं पाया. पहले वह परंपरागत तरीके से ही खेती करती थीं. धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ-साथ उन्होंने वैज्ञानिक विधि से खेती करनी शुरू की और बढ़िया मुनाफा कमाने लगीं.

अन्य महिलाओं को भी बना रही स्वालांबी
खुद के साथ-साथ उन्होंने अन्य महिलाओं को भी स्वालांबी बनाना शुरू किया है. शुरुआती दौर में आस-पास की महिलाओं के साथ जुड़ कर खेती की उपज से आम, बेल, नींबू, आंवला आदि के अचार को बाजार में बेचना शुरू किया. इसके बाद वह अपने समूह को अन्य क्षेत्रों में भी फैलाती गईं. उनके योगदान के लिए कई बार उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है.
दकियानुसी सोच वालों को करारा तमांचा
किसान चाची की सफलता उन लोगों को मुंह पर करारा तमाचा है, जो ये सोचते हैं कि महिलाएं हर काम नहीं कर सकती हैं. उनके साथ काम करने वाली महिलाएं कहती हैं कि पहले परिवार चलाना मुश्किल था. पति खेतों में मजदूरी करते थे. इस दौरान किसान चाची के साथ काम करना शुरू किया. अब अच्छी खासी आमदनी हो रही है.