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Vertical Farming: बिना खेत के खेती! बिहर की महिला बांस में ही उगा लेती है कई तरह की सब्जियां

सुनीता ने साल 2011 में इस तकनीक से खेती की शुरुआत की थी. पीवीसी पाइप में जगह जगह कट लगाया फिर उसमें सब्जियों के पौधे लगाए. पहली बार में ही उन्हें ठीक-ठाक सफलता मिल गई थी. बता दें कि इस तकनीक का उपयोग करते वक्त सुनीता को खेत के एक इंच जमीन का उपयोग नहीं करना पड़ता है.

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Bihar women grows vegetables in PVC and bamboo pipe
Bihar women grows vegetables in PVC and bamboo pipe
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वर्टिकल फार्मिंग में खेतों की जरूरत नहीं
  • PVC या बांस में उगा सकते हैं सब्जियां

Vertical Farming In Bihar:  बिना खेतों के खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. छपरा की रहने वाली सुनीता के पास एक भी बीघा खेत नहीं है, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. अब सुनीता ने खेती की ऐसी तकनीक अपनाई है, जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है. इस तकनीक का उपयोग करते वक्त सुनीता को खेत के एक इंच जमीन का उपयोग नहीं करना पड़ता है.

हाईस्कूल पास सुनीता द्वारा अपनाए गए खेती के इस तरीके को साइंटिफिक भाषा में वर्टिकल फार्मिंग कहा जाता है. सुनीता ने वर्टिकल फार्मिंग के बारे में तब सोचना शुरू किया जब उन्होंने एक कबाड़ी के पास PVC पाइप देखा.

साल 2011 में शुरू की वर्टिकल फार्मिंग
वह बताती हैं कि उन्होंने साल  2011 में इस तकनीक से खेती की शुरुआत की थी. पीवीसी पाइप में जगह जगह कट लगाया फिर उसमें सब्जियों के पौधे लगाएं. पहली बार में ही उन्हें ठीक-ठाक सफलता मिल गई. हालांकि, PVC पाइप ज्यादा खर्चीला होता है लेकिन सुनीता ने इसका भी विकल्प सुनीता ढूंढ़ निकाला. 

अब बांस का पाइप बना कर करती हैं खेती
सुनीता ने बांस की चचरी से पाइप की शक्ल देते हुए वर्टिकल स्टैंड तैयार किया. इस 4 फीट के स्टैंड को बनाने में सिर्फ 40 रुपये का खर्च आया है. वहीं उतनी ही मोटाई के PVC पाइप का स्टैंड का खर्च 500 से ऊपर का आता है.

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छत पर उगा रही हैं कई तरह की सब्जियां
सुनीता ने अपने पूरे छत को और अपने घर के बाहर के हिस्से में चारो तरफ वर्टिकल फार्मिंग से भर दिया है. वह इस तकनीक के माध्यम से  नींबू,मिर्चा, बैंगन,एलोवेरा सहित तमाम सब्जियों की खेती को उगा रही है. सुनीता ने इस कई अन्य महिलाओं को भी इस तकनीक की ट्रेनिंग दी है. इसके लिए वह सम्मानित भी हो चुकी हैं.

नहीं लिया 20 वर्षों से बिजली कनेक्शन
बता दें कि सुनीता बिजली की मामले में भी पिछले 20 वर्षो से आत्मनिर्भर हैं. उन्होंने बिजली कनेक्शन तक नहीं लिया है. फिर भी वो सारा काम बिजली से ही करती है. वह सौर ऊर्जा को सोलर प्लेटो के माध्यम से अपने घर मे इस्तेमाल करने का काम किया है.

सुनीता का कहना है कि जब बिहार में बिजली की काफी परेशानी थी,तब मैं इसी सोलर एनर्जी से लोगो की बैटरियों को चार्ज करके प्रतिदिन लगभग 500 रुपयों की कमाई भी कर लेती थी. सुनीता का यह भी मानना है कि बिहार में सूर्य देव की इतनी कृपा है कि किसी भी घर को बिजली के कनेक्शन लेने की जरूरत नही है,बिजली की सारी जरूरत सिर्फ सोलर से ही पूरी हो सकती है.  

 

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