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हजारों साल पुराना है इस फसल का इतिहास, खेती से मिलता है किसानों को कई गुना मुनाफा

रागी को कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल माना जाता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा है. अमीनो एसिड, कैल्शियम, पौटेशियम की मात्रा रागी भी काफी पाई जाती है. कम हीमोग्लोबिन वाले व्यक्ति के लिए रागी का सेवन करना बेहद फायदेमंद है.

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Ragi Crops (Pi credit: Pexel)
Ragi Crops (Pi credit: Pexel)

खेती-किसानी में मुनाफे वाली फसलों की खेती करने के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसको लेकर सरकार की तरफ से किसानों की मदद भी की जाती है. इन्हीं में कुछ ऐसी फसलें हैं, जिनका हजारों साल पुराना इतिहास हैं. रागी भी कुछ इसी तरह की फसल है. माना जाता है कि इसकी खेती भारत में 4 हजार साल पहले शुरू हुई थी. इस फसल की बुवाई की सबसे पहले अफ्रीका में हुई थी.

सेहत के लिए भी फायदेमंद

रागी को कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल माना जाता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा है. अमीनो एसिड, कैल्शियम, पौटेशियम की मात्रा रागी भी काफी पाई जाती है. कम हीमोग्लोबिन वाले व्यक्ति के लिए रागी का सेवन करना बेहद फायदेमंद है.

रागी की ऐसे होती है खेती

बीजों की रोपाई छिड़काव विधि से की जाती है. इसके बाद दो-तीन हल्की जुताई करते हैं. इसके बीज नीचे जमीन में बैठ जाते हैं. पौधों की सिंचाई रोपाई के लगभग एक से डेढ़ महीने बाद करें. पौधे पर फूल और दाने आने लगें तो 10 से 15 दिन के अंतराल में 2-3 बार सिंचाई करें. बता दें इसकी खेती में प्रति हेक्टेयर 15 से 20 हजार रुपये की ही लागत आती है.

किसानों को इतना है मुनाफा

इसकी फसल तकरीबन 100 दिनों के अंदर कटाई के लिए तैयार हो जाती है. कटाई के दौरान इसके सिरों को पौधों से काटकर अलग करना होता है. अगर अच्छे तरीके से रागी की फसलों की खेती करें तो इसका उत्पादन 25 क्विंटल के आस-पास प्रति हेक्टेयर होता है.  बाजार में इसकी बिक्री 2700 रुपये प्रति क्विंटल के आस-पास हो रही है. अगर 25 क्विंटल के हिसाब से गणना करें तो किसान एक हेक्टेयर में इसके 70 हजार तक मुनाफा कमा सकता है. रकबा जितना ज्यादा होगा मुनाफा भी उतना ही बेहतर.

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