पारंपरिक फसलों की खेती में किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं. इसके चलते किसानों की आय भी प्रभावित हो रही है. ऐसे में किसानों को नई फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. किन्नू भी इसी तरह की फसल है, जिसकी खेती की तरफ किसान काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
इन राज्यों में होती है किन्नू की खेती
किन्नू की खेती उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में की जाती है. इसके सेवन से शरीर में खून बढ़ता है. हड्डियों को भी ये काफी फायदा पहुंचाता है. इसकी खेती पूरे भारत में कहीं भी की जा सकती है. 13 डिग्री से लेकर 37 डिग्री तक में इसके पौधे विकास करते हैं. हालांकि, कटाई के वक्त इसका तापमान 20-32 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए.
एक एकड़ में लगाएं किन्नू के इतने पौधे
एक एकड़ में किन्नू के 111 पौधे लगाए जा सकते हैं. दो पौधों के बीच की दूरी 6*6 मीटर रखें. किन्नू की फसल को शुरुआती विकास के लिए इसे लगातार पानी की जरूरत होती है. हालांकि ज्यादा सिंचाई से बचें क्योंकि इससे जड़ सड़न, कॉलर रोट आदि रोग होते हैं.
कटाई-छंटाई करते रहें
टहनियों और पौधे के विकास के लिए कटाई-छंटाई करनी जरूरी है. यह क्रिया किसी भी समय की जा सकती है, इसकी कटाई-छंटाई का सबसे बढ़िया समय तुड़ाई के बाद होता है, जब पौधों का विकास हो रहा हो तो कटाई-छंटाई न करें. रोगी, प्रभावित, मुरझाई और नष्ट टहनियों को समय-समय पर हटाते रहें.
फलों की तुड़ाई के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत
इसके फलों की तुड़ाई करने में काफी सावधानी बरतने की जरूरत है. डंडी या कैंची की मदद से इसकी तुड़ाई करें. ध्यान रखें तु़ड़ाई के दौरान किन्नू के फल को ज्यादा नुकसान न पहुंचे किन्नू की फसल को किसान कहीं भी बेच सकते हैं, लेकिन बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, दिल्ली, पंजाब आदि में काफी ज्यादा बिक्री होती है. इसके अलावा विदेशों में भी इसकी काफी मांग है. भारत से बड़े पैमाने में किन्नू के फल विदेशों में निर्यात किए जाते हैं. ऐसे में किसानों को इस फल की खेती से बढ़िया मुनाफा हो सकता है.