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एक साल: कृषि कानून वापस लेकिन आंदोलन जारी... क्या है अब आगे की राह?

पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक... अब किसान आंदोलन के व्यापक विस्तार की संपूर्ण रणनीति तैयार हो चुकी हैं, वही रणनीति जिसका ट्रेलर आज दिखेगा जबकि पूरी पिक्चर 29 नवंबर को रिलीज होगी.

किसान नेता राकेश टिकैत किसान नेता राकेश टिकैत
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • कृषि कानून वापस लेकिन आंदोलन जारी
  • कोई बता रहा राजनीति, कोई कह रहा रणनीति

किसान आंदोलन के एक साल पूरे हो गए हैं. कई नाटकीय मोड़ देखने वाला ये आंदोलन अभी भी जारी है. कृषि कानून वापसी का ऐलान हो चुका है, लेकिन किसान सड़क पर डटे हुए हैं. सवाल यही है कि जब तीनों कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई तो किसान आंदोलन को लेकर अड़े क्यों हैं. क्या किसान आंदोलन के बहाने सियासत भी हो रही है

किसान संगठनों का प्लान पूरी दिल्ली का चक्का जाम करने का है. 27 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन के आगे की रूपरेखा तय करेगा. 29 नवंबर को दिल्ली के खुले हुए रास्तों पर बड़ी ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी.

अब भी किसान आंदोलन जारी क्यों?

पूरब से पश्चिम तक. उत्तर से दक्षिण तक. अब किसान आंदोलन के व्यापक विस्तार की संपूर्ण रणनीति तैयार हो चुकी हैं, वही रणनीति जिसका ट्रेलर आज दिखेगा जबकि पूरी पिक्चर 29 नवंबर को रिलीज होगी. एक बार फिर किसान पूरी ताकत के साथ दिल्ली घेरने की कोशिश में है, मांग यही है जबतक एमएसपी पर कानूनी. गारंटी नहीं तब तक दिल्ली की घेरेबंदी जारी रहेगी. किसान संगठनों का यही दावा है कि जैसे तीनों कृषि कानूनों पर सरकार को झुकना पड़ा, अब एमएसपी समेत 5 मांगों पर किसानों की बातें माननी पड़ेंगी.

केंद्र सरकार पर दवाब बनाने के लिए किसानों ने आंदोलन को पहले से ज्यादा ताकतवर बनाने के संकेत दे दिए हैं. मसलन किसान आंदोलन की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए 26 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर के चार बॉर्डर यानी शाहजहांपुर, टिकरी, सिंघु और गाजीपुर पर बड़ी सभाएं आयोजित होंगी. शंभू बॉर्डर से लेकर सिंघू बॉर्डर तक बड़ा मार्च निकाला जाएगा.

दिल्ली से दूर के राज्यों में वहां राजधानी और दूसरी जगहों में प्रदर्शन होंगे. प्रदर्शन के अगले चरण में 29 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने पर दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे. 30 टैक्ट्रर गाजीपुर बॉर्डर से और 30 ट्रैक्टर टिकरी बॉर्डर से दिल्ली की तरफ कूच करेंगे. 60 ट्रैक्टर पर 1000 किसान दिल्ली में दाखिल होंगे.

आगे की रणनीति क्या?

देश के अलावा विदेशों में भी आंदोलन का धार दी जाएगी. प्लान के मुताबिक ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नीदरलैंड और अमेरिका में बड़े स्तर पर अलग-अलग तारीख को प्रदर्शन करने की योजना है. 26 नवंबर को लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन होगा. 26 नवंबर को ही कनाडा में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन होगा. 30 नवंबर को फ्रांस के पेरिस में आंदोलनकारी किसान कृषि कानूनों पर अपनी जीत का जश्न मनाएंगे,

4 दिसंबर को कैलिफोर्निया में बड़ी रैली का आयोजन होगा, इसी दिन न्यूयॉर्क में सिटी मार्च निकालने का प्लान है तो सैन जोस गुरुद्वारा में स्मरणोत्सव और मोमबत्ती जलूस निकाला जाएगा. वही 5 दिसंबर को नीदरलैंड में और  8 दिसंबर को ऑस्ट्रिया के वियाना समेत कई और मुल्कों में विरोध प्रदर्शन होगा. 

बड़ी बात ये है कि अपनी नई मांगें मनवाने के लिए किसान सिर्फ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन नहीं करेंगे, इस बार देश के साथ-साथ दुनियाभर मे विदेशी किसान संगठनों की मदद से भारतीय दूतावासों के बाहर प्रोटेस्ट होंगे. किसान संगठनों की तैयारी सिर्फ छह मांगों तक सीमित नहीं हैं, प्लान 2022 से लेकर 2024 चुनाव तक तैयार हैं. भले ही तीन कृषि कानूनों की वापसी पर कैबिनेट की मुहर लग चुकी हैं, लेकिन सरकार के यू-टर्न ने किसानों को अपनी मांगें मनवाने की नई राह दिखा दी हैं. यानी अब मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं क्योंकि अगले साल पांच राज्यों में चुनाव हैं.

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