बारिश का मौसम गुजरने के बाद बड़ी संख्या में कीट-पतंग पनपने लगते हैं. ये अक्सर घरों में लगे बल्ब-ट्यूबलाइट्स, लैंप, दीये या रोशनी के अन्य स्रोत के आस-पास मंडराते नजर आते हैं. हालांकि, जानकार मानते हैं कि इस बार उस तरह का नजारा नहीं है, जैसा कि कुछ साल पहले होता था. दिवाली से पहले तो ये कीट खासी परेशानी का सबब बन जाते थे. अब शहर हो या गांव, ये सूक्ष्य जीव नजर तो आ रहे, लेकिन उनकी तादाद बेहद सीमित है. घर हो या खेत, हर जगह कीटों की मौजूदगी कम होती जा रही है. एक बार ऐसा लग सकता है कि इससे क्या फर्क पड़ता है, अच्छा ही तो है. हालांकि, वैज्ञानिक इन परिस्थितियों को लेकर बेहद चिंतित हैं. उनका मानना है कि नए हालात की वजह से खेती से लेकर प्रकृति को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है.
कीट-पतंगों के पनपने के लिए अगस्त-सितंबर का महीना सबसे मुफीद माना जाता है. अगस्त का महीना इनके प्रजनन होता है. नमी और बारिश का मौसम इनके पनपने के साथ-साथ विकास के लिए जरूरी माने जाते हैं. हालांकि, इस बार उत्तर भारत के कई राज्य सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं. मॉनसून में भी अनुमान के मुताबिक, बारिश नहीं हुई है. विशेषज्ञों की मानें तो कम बारिश के चलते इस बार कीटों को पनपने का मुफीद वातावरण नहीं मिला.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
डॉ दयाशंकर श्रीवास्तव कृषि विज्ञान केंद्र 2 -सीतापुर में वैज्ञानिक फसल सुरक्षा एवं प्रभारी अध्यक्ष हैं. aajtak.in से बातचीत में वह बताते हैं कि इस मौसम में दुश्मन कीट के अलावा मित्र कीट भी पनपते हैं. फसल उत्पादन बढ़ाने में इन कीटों की अहम भूमिका है. भंवरा भी इसी तरह का कीट माना जाता है. फूलों की खेती के लिए इसका होना बहुत जरूरी माना जाता है. हालांकि, अब धीरे-धीरे इनकी संख्या कम हो गई है. अन्य जीवों के साथ भी यही स्थिति है.
कीटनाशकों के उपयोग से भी मर रहे हैं कीट
डॉ दयाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि खेती-किसानी में कीटनाशक का उपयोग लगातार बढ़ते जा रहा है. इसके उपयोग से मित्र कीट भी मर जा रहे हैं. इसके अलावा किसान फसल विविधिकरण को लेकर भी किसान इतने जागरूक नहीं है. इससे भी दुश्मन कीट के साथ-साथ मित्र कीट मर रहे हैं और प्रकृति का बैलेंस भी बिगड़ रहा है. यही वजह है कि केंद्र सरकार खेती में पारिस्थितिक अभियांत्रिकी तकनीक यानी इको लॉजिकल इंजीनियरिंग को बढ़ावा देने के कार्यक्रम पर काम कर रहा है. इस कार्यक्रम के माध्यम से खेतों में रसायनिक कीटनाशकों के उपयोग को कम करके फसल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किसानों को ट्रेनिंग दी जाती है.
खराह कीट-पतंग से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
बताते हैं कि इस तकनीक में खेतों की बाउंड्री पर मक्का, बाजरा और ज्वार जैसे फसल लगा सकते हैं. इससे फायदा ये होता है कि खेतों की बाउंड्री पर एक घेरा बन जाता है और दुश्मन कीट खेतों में प्रवेश नहीं कर पाते हैं. इसके अलावा हम लेमनग्रास जैसे कुछ औषधीय पौधे भी लगा देते हैं, जो खराब कीट को खत्म करने में काफी सहायक होते हैं.