इस्लामाबाद में उतरा जेडी वेंस का प्लेन (Photo: Reuters) पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर पूरा हो गया. यह बातचीत करीब चार घंटे तक चली. इस बैठक की मेजबानी पाकिस्तान ने की और इसमें तीनों देश शामिल थे.
इस बातचीत का मुख्य फोकस था - पश्चिम में सीजफायर को मजबूत करना, लेबनान में चल रहे युद्ध को रोकना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना.
अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने टीम की अगुवाई की. उनके साथ जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मौजूद थे. वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने नेतृत्व किया. पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने मेजबानी की.
बातचीत के दौरान माहौल थोड़ा तनावपूर्ण रहा. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी जहाजों पर हमले की धमकी दी और साथ ही अपने फ्रीज़ एसेट्स खोलने की मांग दोहराई.
दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है और वहां जहाजों की आवाजाही को रोका नहीं जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस रास्ते को खुला रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा.
हालांकि बातचीत में तनाव था, लेकिन दोनों पक्षों ने संकेत दिए हैं कि वे आगे भी बातचीत जारी रखेंगे. पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि इससे स्थायी शांति की दिशा में रास्ता निकलेगा.
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इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान बातचीत में अब सबसे बड़ा विवाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सामने आ गया है. ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, होर्मुज का मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मतभेद बना हुआ है. यानी इस पर दोनों पक्ष अभी बिल्कुल सहमत नहीं हैं.
इनपुट: रॉयटर्स
रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि IDF के हमलों में 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ये हमले हिज्बुल्लाह के साथ चल रहे युद्ध के दौरान हुए.
इनपुट: AP
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज करने के लिए हामी भर दी है. यानी जो पैसा या संपत्ति पहले रोकी गई थी, उसे वापस देने पर सहमति बन गई है. अमेरिका ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है. बल्कि अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसी किसी भी नई डील से इनकार किया है.
इनपुट: Al Jazeera
रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच कई घंटों से बातचीत चल रही है. लेकिन अभी तक कोई बड़ा फैसला या समझौता नहीं हुआ है. बातचीत के दौरान जब आमने-सामने चर्चा से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो अब दोनों देशों की एक्सपर्ट टीमों ने एक नया तरीका अपनाया है. अब दोनों पक्ष लिखित तरीके से अपनी बात रख रहे हैं. यानी जो भी मुद्दे हैं, उन्हें कागज या लिखित नोट्स के जरिए एक-दूसरे तक पहुंचाया जा रहा है.
इनपुट: प्रेस टीवी
ईरान की ओर से ताजा बयान में चेतावनी जारी करते हुए कहा गया है कि हमारे इजाजत के बिना कोई भी जहाज होर्मुज के रास्ते से जा नहीं सकती.
इनपुट: प्रेस टीवी
पाकिस्तान के प्लानिंग और डेवलपमेंट मंत्री अहसान इकबाल ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान इस बातचीत में कोई ठोस नतीजा निकालेंगे. लेकिन अगर ऐसा नहीं भी होता है, और दोनों देश सिर्फ सीजफायर को आगे बढ़ाने और अगली बातचीत के लिए सहमत हो जाते हैं, तो भी इसे एक सफलता माना जाना चाहिए. पूरी दुनिया की इकोनॉमी दाव पर लगी हुई है.
इनपुट: Al Jazeera
ईरान का कहना है कि अमेरिका की तरफ से उन पर आरोप लगाया जा रहा है कि वो 'ईमानदारी से बात नहीं कर रहे' और 'दबाव बनाकर फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.' लेकिन ईरान ने इस पर पलटकर कहा है कि अमेरिका के कुछ पॉलिसी सर्कल और मीडिया में ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं, जहां ये सुझाव दिया जा रहा है कि अगर बातचीत फेल हो जाती है, तो ईरान के बातचीत करने वाले लोगों को मार देने तक की बात की जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने यानी उसकी अवधि बढ़ाने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है. इसका सीधा मतलब है कि अभी ये तय नहीं हुआ है कि बातचीत और दिनों तक चलेगी या नहीं.
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ईरान और अमेरिका के बीच पहले दौर की बातचीत फिर से शुरू हो गई है.
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इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच पहले दौर की बातचीत समाप्त हो गई है. यह बातचीत करीब दो घंटे तक चली. अब अगले दौर यानि की दूसरे दौर की बातचीत डिनर के टेबल पर होगी.
अमेरिका ने ईरानी अधिकारियों से जुड़े लोगों पर कार्रवाई करते हुए कुछ ईरानी मूल के स्थायी निवासियों के ग्रीन कार्ड रद्द कर दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है. पूरी खबर को यहां क्लिक कर पढ़ें - हिरासत, डिपोर्टेशन और सख्ती... ईरानी मूल के लोगों पर US का एक्शन, ग्रीन कार्ड रद्द किया
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पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत को अब दो घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं. जो तस्वीर आप देख रहे हैं उसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस के साथ और अलग से ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ के साथ मुलाकात की खबरें दिखाई जा रही हैं.

ईरान के पाकिस्तान में राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने कहा है कि इस्लामाबाद में हो रही अमेरिका-ईरान वार्ता का उद्देश्य ईरान के खिलाफ चल रहे 'अवैध युद्ध' को खत्म करना है, जिससे बातचीत का रुख साफ हो गया है.
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इजरायल के मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू पर दबाव डालते हुए बेरूत पर हमले रोकने और लेबनान सरकार से बातचीत करने की सलाह दी है, जिससे मिडिल ईस्ट तनाव में नया मोड़ आ सकता है.
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ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता के लिए शर्त रखी है कि बेरूत पर हमले पूरी तरह रोके जाएं. उसने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो बातचीत पूरी तरह रद्द हो सकती है. यह जानकारी ईरान के सूत्रों के हवाले की ओर से आई है. अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है.
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पाकिस्तान में शांति वार्ता के बीच ईरान ने अमेरिका को धमका दिया है. ईरान ने है कि अगर होर्मुज के रास्ते अमेरिका का जहाज आया तो अगले 30 मिनट में हमला कर देंगे.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह खाद की बढ़ती कीमतों पर नजर रख रहे हैं और किसी भी तरह की मुनाफाखोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने अमेरिकी किसानों को भरोसा दिया कि सरकार उनके साथ खड़ी है. ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में खाद की सप्लाई प्रभावित हुई है. ट्रंप ने इसी को लेकर सख्त संदेश दिया है कि बड़ी कंपनियां इस स्थिति का फायदा उठाकर कीमतें न बढ़ाएं.
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बैठक चल रही है. इस बैठक को लेकर शहर में सेरेना होटल की ओर जाने वाली सड़क पर सुरक्षाकर्मी पहरा दे रहे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है. यह मुलाकात इस्लामाबाद में हुई. दोनों देशों के साथ अलग-अलग बातचीत की गई. इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, लेबनान में सीजफायर और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास अगले दो सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों से भी ज्यादा तेल है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर है. पूरी खबर को यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं - 'अमेरिका के तरफ टैंकर चल पड़े', PAK में ईरान से बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत शुरू हो गई है. पूरी खबर को यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं - इस्लामाबाद में शुरू हुई अमेरिका-ईरान की बातचीत
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि लेबनान में सीजफायर होना हमारे बीच हुए समझौते का हिस्सा था. पाकिस्तान की तरफ से भी इसकी पुष्टि की गई है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि मैंने अभी तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन से मुलाकात की. पहले हमने मध्य पूर्व की स्थिति पर बात की. हमने कहा कि लेबनान में सीजफायर हो जाना चाहिए और उसे सही से लागू किया जाए. होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह आजाद होनी चाहिए. साथ ही हमने एक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला शांतिपूर्ण हल निकालने की जरूरत पर जोर दिया.
ईरान की सबसे बड़ी मांग यही रही है कि उसके जो एसेट्स फ्रीज हैं, उन्हें अनफ्रीज किया जाए. लेकिन व्हाइट हाउस की तरफ से साफ कर दिया गया है कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है.
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई ने कहा है कि डॉ. सय्यद कमाल खाराजी की शहादत इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के लिए गर्व की बात है. वे विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में एक बेहतरीन विद्वान थे और विदेश नीति के अनुभवी नेता थे. उनकी शहादत ईरान के लिए सम्मान का प्रतीक है.
इस्लामाबाद में चल रही बातचीत अभी दो तरफा (बाइलेटरल) है. पाकिस्तान अमेरिका के साथ अलग बात कर रहा है और पाकिस्तान ईरान के साथ भी अलग बात कर रहा है. अगर दोनों तरफ की मांगें और शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो आगे जाकर ये बातचीत तीनों देशों के बीच त्रिपक्षीय (ट्राइलेटरल) हो सकती है.
अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान दोनों पक्षों को पूरी मदद और सुविधा देगा. लेकिन बातचीत किस फॉर्मेट में होगी, यह फैसला पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान को खुद करना होगा, जिसमें वे सबसे ज्यादा सहज महसूस करें.
इनपुट: Al Jazeera
रक्षा विशेषज्ञ - रिटायर्ड मेजर जनरल संजय सोई का कहना है कि अगर ओवरऑल स्ट्रैटेजिक इंटरेस्ट की बात करें तो इजरायल और अमेरिका के लक्ष्य पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं. इजरायल के लिए यह अस्तित्व का सवाल है. अगर उसके आसपास हिज़्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूह लगातार हमले करते रहें, और उन्हें ईरान का समर्थन मिलता रहे, तो इजरायल के सामने सीधा सवाल है - वह बचेगा कैसे. इसलिए वह वर्षों से लगातार लड़ रहा है. वहीं अमेरिका हजारों मील दूर बैठा है, उसके हित अलग हैं. वह चाहता है कि ईरान एक बड़ी ताकत बनकर न उभरे और क्षेत्र में उसका प्रभाव सीमित रहे, चाहे वह तेल (ऑयल) से जुड़ा नियंत्रण हो या जियो-पॉलिटिकल बैलेंस.
ईरान के लिए भी स्थिति आसान नहीं है. अगर वह हिजबुल्लाह जैसे अपने सहयोगियों का साथ छोड़ देता है, तो उसकी क्रेडिबिलिटी खत्म हो जाएगी. यही इस पूरे संकट का सबसे बड़ा पेच है. इसी वजह से बातचीत में रुकावटें आई हैं और डेडलॉक की स्थिति बनी है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया है कि भरोसे की कमी इस बातचीत पर भारी पड़ सकती है. पूरी खबर को यहां क्लिक कर पढ़ें - ईरान-US में जंग रोकने पर बनेगी बात? ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नए बयान से बढ़ी हलचल
इस्लामाबाद में शुरू हुई अहम वार्ता के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह बातचीत क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में अहम कदम साबित होगी.

इनपुट: पाकिस्तान पीएमओ
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात के पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी. इसकी तस्वीर सामने आई है.

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत की है. प्रधानमंत्री शरीफ के साथ डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और विदेश मंत्री इशाक दार तथा गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी मौजूद थे. अमेरिकी उपराष्ट्रपति के साथ स्पेशल एन्वॉय स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी थे.
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान की सेना का एक हिस्सा उनके यहां पहुंच गया है. इसमें पाकिस्तानी फाइटर जेट्स भी शामिल हैं. यह सब दोनों देशों के बीच हुए डिफेंस समझौते के तहत हुआ है. पाकिस्तानी सैनिकों की यह टुकड़ी सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पहुंची है.
ख़ास बात है कि पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग में अब सीजफायर हो चुका है. जंग के दौरान सऊदी पर भी ईरान ने हमला किया था. इस दौरान काफी नुक़सान भी हुआ.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में एक बड़ा ब्रेकथ्रू सामने आया है. रॉयटर्स ने ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका, ईरान के दूसरे देशों में फंसे हुए पैसे जारी करने के लिए तैयार हो गया है. यह पैसा कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा है. बदले में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है. तेहरान इस कदम को अमेरिका की गुडविल और शांति वार्ता को लेकर उसकी गंभीरता के तौर पर देख रहा है.
इस्लामाबाद में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की है. इस डेलिगेशन की अगुवाई ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ कर रहे हैं, उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी मौजूद हैं.
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि मुजतबा उस हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें उनके पिता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी. खबर के मुताबिक, हमले में मुजतबा का चेहरा बुरी तरह झुलस गया था और उनके पैरों में भी चोटें आई थीं. 56 वर्षीय मुजतबा फिलहाल किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आ रहे हैं और अधिकारियों के साथ ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें कर रहे हैं. हालांकि, दावा यह भी है कि वे मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय हैं और अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता समेत तमाम बड़े फैसलों में शामिल हैं.
इस्लामाबाद वार्ता से ठीक पहले ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने अमेरिका को बेहद सख्त और सीधा संदेश भेजा है. ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर वे अमेरिका फर्स्ट के प्रतिनिधियों से बात कर रहे हैं, तो एक ऐसी डील मुमकिन है जो दोनों देशों और दुनिया के लिए फायदेमंद हो. लेकिन, अगर अमेरिका इजरायल फर्स्ट की सोच के साथ मेज पर आता है, तो कोई समझौता नहीं होगा. ईरान ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में वे पहले से कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपनी रक्षा जारी रखेंगे, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना होगा.
इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के बीच पेंच फंसता नजर आ रहा है. ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत का समय तभी तय होगा, जब उनकी पूर्व शर्तों पर स्थिति साफ हो जाएगी. मेहर न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी डेलिगेशन अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है. अब पूरी बातचीत इस बात पर टिक गई है कि क्या अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान की इन शर्तों को स्वीकार करता है या नहीं.
ईरान की वार्ता टीम ने कल रात पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की थी और आज यह प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मिलेगा. ये मुलाकात दोपहर 1 बजे एक निर्धारित है
'तस्नीम' समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत कई दिनों तक चलने वाली खबरें गलत हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक अगर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो ये वार्ताएं एक दिन की ही होंगी.
इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के लिए अमेरिका की हाई-प्रोफाइल टीम पाकिस्तान पहुंच गई है. अमेरिकी डेलिगेशन की अगुवाई कर रहे जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ अब से कुछ ही देर में ईरानी पक्ष के साथ चर्चा शुरू करेंगे. पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक, यह टीम राष्ट्रपति ट्रंप का सीधा संदेश लेकर आई है.
अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता में देरी की खबर है. पहले के कार्यक्रम के मुताबिक, यह बातचीत स्थानीय समयानुसार सुबह 8 बजे शुरू होनी थी, लेकिन अब इसके दोपहर में शुरू होने की संभावना है. तस्नीम (Tasnim) न्यूज के मुताबिक, कुछ कारणों से शेड्यूल में बदलाव किया गया है. अब दोपहर के वक्त ही तय हो पाएगा कि दोनों देशों के बीच शांति डील को लेकर मुख्य चर्चा कब शुरू होगी.
शांति वार्ता में शामिल होने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का विमान अगले करीब एक घंटे में इस्लामाबाद लैंड कर सकता है. ओपन सोर्स फ्लाइट ट्रैकर के मुताबिक, उनकी यह स्पेशल फ्लाइट पेरिस से उड़ान भरकर सेंट्रल एशियाई देशों के रास्ते पाकिस्तान आ रही है. सुरक्षा के लिहाज से उनके विमान ने ईरान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया है और वहां से बचकर निकल रहा है. जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान के साथ होने वाली इस अहम बैठक में शामिल होगा. पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त उनके विमान की लैंडिंग और उसके बाद शुरू होने वाली बातचीत पर टिकी हैं.

शांति वार्ता के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट सामने आई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के मुताबिक, भले ही युद्ध में ईरान की आधी ताकत खत्म हो गई हो, लेकिन उसके पास अब भी हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें बची हुई हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने अंडरग्राउंड ठिकानों से मिसाइल लॉन्चर्स को फिर से बाहर निकाल सकता है और उन्हें दोबारा एक्टिव करने की काबिलियत रखता है. यह खुलासा इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. लेकिन इंटेलिजेंस रिपोर्ट कहती है कि ईरान के पास अब भी 1000 से ज्यादा मीडियम रेंज की मिसाइलें सुरक्षित हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महावार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पूरी तरह तैयार है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, सुरक्षा के मद्देनजर संसद, सरकारी दफ्तरों, दूतावासों और बड़े होटलों वाले रेड जोन की ओर जाने वाली तमाम सड़कों को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया है. शहर में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं. ईरान का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को ही इस्लामाबाद पहुंच चुका है. इस दल की अगुवाई ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं.
इस्लामाबाद में हो रही इस ऐतिहासिक शांति वार्ता में ईरान की ओर से 6 बड़े चेहरे शामिल हो रहे हैं. इस टीम का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं, जिनके साथ ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ भी मौजूद हैं. इनके अलावा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की कमान संभालने वाले अली अकबर अहमदीन और अब्दोलनासेर हेम्मती भी वार्ता की मेज पर बैठेंगे. इसके अलावा, अनुभवी राजनयिक मजीद तख्त रवांची और सुरक्षा मामलों के जानकार मोहम्मद बागेर जोल्घाद्र भी वार्ता का हिस्सा बन सकते हैं.
वहीं, अमेरिका की ओर से 4 बेहद प्रभावशाली हस्तियां इस बैठक के लिए पाकिस्तान पहुंची हैं. इस हाई-प्रोफाइल टीम की अगुवाई खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं. उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद और उनके दामाद जारेड कुशनर भी शामिल हैं, जो पहले भी कई अहम समझौतों का हिस्सा रह चुके हैं. पश्चिम एशिया के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सैन्य रणनीतिकार वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर भी ईरान के साथ होने वाली इस चर्चा में अमेरिका का पक्ष रखेंगे.
चूंकि पाकिस्तान इस ऐतिहासिक शांति वार्ता की मेजबानी और मध्यस्थता कर रहा है, इसलिए देश के कई शीर्ष अधिकारी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं. इस महाबैठक को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद होस्ट कर रहे हैं, जिनके साथ थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी सुरक्षा और रणनीतिक लिहाज से बेहद खास है. इसके अलावा, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद असीम मलिक भी वार्ता की मेज पर मौजूद रहेंगे, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को सफल बनाया जा सके.
जेडी वेंस, कुश्नर, गलिबाफ, अराघची... इस्लामाबाद में शांति की मेज पर अमेरिका-ईरान से कौन-कौन, आ गई लिस्ट
https://www.aajtak.in/world/story/us-iran-peace-talks-islamabad-pakistan-ghalibaf-araghchi-vance-to-attend-ntc-drmt-dskc-2520943-2026-04-11
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में आगाह किया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी तरह का टैक्स या टोल वसूलने की कोशिश न करे. ट्रंप ने दो टूक कहा कि 'यह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है और हम वहां ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे.' उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा और वहां मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है.