कतर से लगी सीमा के समानांतर एक समुद्री नहर बनाने के प्रस्ताव पर सऊदी अरब विचार कर रहा है. अगर ऐसा हुआ तो कतर एक द्वीप बनकर रह जाएगा और इसके सीमाई इलाके सैन्य क्षेत्र तथा न्यूक्लियर कचरा निपटारा साइट ही रह जाएंगे. अगर इस प्रस्ताव पर सऊदी आगे बढ़ा तो इससे खाड़ी में और तनाव बढ़ सकता है.
सऊदी अरब के कई अखबारों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को अभी आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है और इसके रास्ते में अभी कई अड़चनें हैं. लेकिन इस प्रस्ताव से कतर और सऊदी अरब, यूएई, मिस्र तथा बहरीन जैसे देशों के बीच चल रही तकरार में और इजाफा हो सकता है.
सऊदी अरब, यूएई, मिस्र तथा बहरीन ने कतर पर यह आरोप लगाया है कि वह इलाके में सरकार विरोधी इस्लामी संगठनों का सहयोग कर और ईरान के साथ अपने करीबी रिश्ते की वजह से आतंकवाद को प्रायोजित कर रहा है. कतर इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका आरोप है कि उसकी संप्रभुता को दबाने की कोशिश की जा रही है.
कतर के सत्तारूढ़ अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने सोमवार को वाशिंगटन में अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस से मुलाकात की. इस प्रस्ताव के मुताबिक सऊदी अरब कतर से सटी सीमा के इस पार अपने हिस्से में एक सैन्य बेस बनाएगा और एक अन्य इलाका विकसित करेगा जिसे न्यूक्लियर रिएक्टर्स के कचरे के लिए डंप साइट बनाया जाएगा. यूएई ने कतर से लगी अपनी सीमा के पास एक न्यूक्लियर वेस्ट साइट बनाने की योजना बनाई है.
सबक अखबार की एक खबर के अनुसार, इस नहर के बनने से कतर एक द्वीप बन जाएगा और इसे पूरा होने में 12 महीने लगेंगे. सलवा मरीन कैनाल नामक इस प्रोजेक्ट के लिए सऊदी और अमीरात के निवेशक पैसा लगाएंगे. इसे मिस्र की एक कंपनी बनाएगी जिसे स्वेज नहर बनाने का अनुभव है.
इससे एक वाटरफ्रंट समुद्री तट तैयार होगा जिसमें रिजॉर्ट, निजी बीच और गल्फ क्रूज लाइनर होंगे. इस नहर के निर्माण पर करीब 75 करोड़ डॉलर की लागत आएगी. यह करीब 200 मीटर चौड़ा और 20 मीटर गहरा होगा.