राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि बदलाव सिर्फ चुनौती नहीं, अवसर भी है (Photo: AFP) रूस में सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम यानी SPIEF का आयोजन हो रहा है. दुनिया के सबसे प्रभावशाली आर्थिक मंचों में से एक है. यह फोरम 1997 से हर साल आयोजित होता है और 2006 से इसे रूसी राष्ट्रपति के संरक्षण में आयोजित किया जाता है. इस साल यानी 2026 में यह 29वां संस्करण है, जो 3 से 6 जून तक सेंट पीटर्सबर्ग के एक्सपोफोरम सेंटर में चल रहा है.
इस बार फोरम की थीम है, 'व्यावहारिक बातचीत: एक स्थिर भविष्य की ओर बढ़ने का रास्ता' यानी एक स्थिर भविष्य की ओर व्यावहारिक संवाद. 100 से अधिक देशों से करीब 20,000 प्रतिभागी इस फोरम में शामिल हो रहे हैं.
आज फोरम का सबसे महत्वपूर्ण दिन है. मुख्य प्लेनरी सेशन शुरू हो गया है, जिसमें एक साथ मंच पर कई लोग हैं.
और इस पूरे सेशन का संचालन कर रह रही हैं इंडिया टुडे ग्रुप की संवाददाता गीता मोहन. यह भारतीय मीडिया के लिए एक बड़ा मौका है क्योंकि इंडिया टुडे एकमात्र भारतीय न्यूज चैनल है जिसे इस 'ग्लोबल हाई टेबल' पर जगह मिली है.
दुनिया की बड़ी ताकतें आज एक मंच पर - आजतक पर LIVE कवरेज.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उन्हें फिलहाल यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने की कोई वजह नजर नहीं आती. पुतिन के मुताबिक एक रूसी कारोबारी ने कीव में जेलेंस्की से मुलाकात की थी और वहां बैठक की इच्छा जताई गई थी. हालांकि उन्होंने कहा कि इस समय प्राथमिकता स्थायी शांति समझौतों पर होनी चाहिए.
SPIEF 2026 में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के हमलों से रूस को कुछ नुकसान जरूर हो रहा है, लेकिन कीव के रुख में विरोधाभास दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन अमेरिका से हथियार तो चाहता है, लेकिन शांति वार्ता में वाशिंगटन को गारंटर की भूमिका नहीं देना चाहता. पुतिन ने रूस की अर्थव्यवस्था और निवेश माहौल को लेकर भी भरोसा जताया.

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अपने संबोधन में दोहराया कि रूस अलग-थलग पड़ने के बजाय अपने साझेदारों का दायरा बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि रूस की आर्थिक वृद्धि भले ही फिलहाल मध्यम गति से हो रही हो, लेकिन देश के पास मजबूत आधार मौजूद है. निवेश, तकनीक, शिक्षा और नए व्यापारिक संबंधों के जरिए रूस भविष्य में और अधिक मजबूती हासिल करेगा.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि आज की दुनिया में वास्तविक ताकत केवल सैन्य शक्ति या आर्थिक आकार से नहीं आती, बल्कि तकनीकी क्षमता, वित्तीय स्वतंत्रता, कुशल लोगों और प्रभावी संस्थानों से आती है. उन्होंने अपने संबोधन का सार देते हुए कहा कि संप्रभुता केवल राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह आर्थिक दक्षता, तकनीकी आत्मनिर्भरता, मानव संसाधन विकास और वैश्विक साझेदारी का सम्मिलित परिणाम है. रूस इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि युवा सबसे अधिक गतिशील वर्ग होते हैं और उन्हें अपने करियर की शुरुआत के लिए अधिक अवसर मिलने चाहिए. उन्होंने बताया कि रूस सरकार इंटर्नशिप को कानूनी ढांचा देने और छात्र अनुबंध प्रणाली को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है. इसके लिए श्रम कानून में संशोधन भी तैयार किए गए हैं. उन्होंने सरकार और संसद से इन सुधारों को तेजी से लागू करने का आग्रह किया.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसके लोग हैं. उनके ज्ञान, कौशल, शिक्षा और नई तकनीकें सीखने की क्षमता से ही देश आगे बढ़ता है. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अगर लोगों को अच्छी शिक्षा, बेहतर रोजगार और उच्च वेतन मिलता है, तभी कोई देश वास्तव में प्रतिस्पर्धी बन सकता है.
उन्होंने बताया कि रूस में बेरोजगारी दर लगभग 2.2 प्रतिशत है, जो दुनिया की सबसे कम दरों में से एक है. तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जापान में यह 2.5 प्रतिशत, भारत और अमेरिका में 4.2 प्रतिशत तथा यूरोजोन में लगभग 5.9 प्रतिशत है.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि आने वाले वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑटोनॉमस सिस्टम्स आर्थिक विकास के मुख्य इंजन बनने वाले हैं. उन्होंने बताया कि रूस ने पहले ही राष्ट्रीय एआई विकास रणनीति अपनाई है. अब सरकार ऑटोनॉमस सिस्टम्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम के लिए भी अलग रणनीति तैयार करेगी.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल संसाधनों पर आधारित नहीं होगी, बल्कि डेटा, तकनीक और ज्ञान पर आधारित होगी. जो देश इन क्षेत्रों में आगे होंगे, वही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाए रखेंगे.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस जैसे विशाल देश की संप्रभुता केवल राजधानी या कुछ बड़े औद्योगिक केंद्रों तक सीमित नहीं हो सकती. देश के हर क्षेत्र को निवेश आकर्षित करना होगा, अच्छी नौकरियां पैदा करनी होंगी, उद्योग विकसित करने होंगे और लोगों के लिए बेहतर शहरी माहौल तैयार करना होगा. उन्होंने कहा कि रूस के विभिन्न क्षेत्र अपने विकास मॉडल, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को निवेशकों और कंपनियों के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं. इससे विदेशी और घरेलू निवेश को बढ़ावा मिल रहा है.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पैनल चर्चा में शामिल मेहमानों ने भी रूस के विभिन्न क्षेत्रों की विविधता को देखा होगा और यह समझा होगा कि देश के अलग-अलग हिस्से किस तरह अपनी विशेष क्षमताओं के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस ने यह सबक कठिन तरीके से सीखा है. उसने देखा कि कैसे कई विदेशी सॉफ्टवेयर कंपनियां बाजार छोड़कर चली गईं, भुगतान प्रणाली बाधित हुई और राजनीतिक फैसलों ने व्यावसायिक संबंधों को प्रभावित किया.
इसी वजह से रूस अब अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और केवल उन्हीं साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है जो पारस्परिक प्रतिबद्धताओं का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि चीन के साथ रूस की साझेदारी इसी सोच का उदाहरण है. दोनों देशों का सहयोग हाई-टेक, परिवहन, मशीन निर्माण और ऊर्जा जैसे अनेक क्षेत्रों में फैला हुआ है.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि जिन देशों या समूहों के पास अपनी तकनीक, AI सिस्टम, ऑटोनॉमस तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म होंगे, वही भविष्य की बहुध्रुवीय दुनिया में वास्तविक संप्रभुता के केंद्र बनेंगे.
उन्होंने कहा कि बड़ी आबादी, विशाल भूभाग और विशिष्ट संस्कृति वाले देशों के लिए अपनी तकनीकी क्षमता विकसित करना अनिवार्य है. अगर वे केवल दूसरे देशों की तकनीक पर निर्भर रहेंगे तो वे डिजिटल रूप से उनपर निर्भर बन जाएंगे.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में तीन तकनीकें दुनिया को सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगी.
पहली - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जो विशाल मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है.
दूसरी - ऑटोनॉमस सिस्टम्स, जो श्रम उत्पादकता को बढ़ाएंगे और कई उद्योगों का स्वरूप बदल देंगे.
तीसरी - प्लेटफॉर्म आधारित डिजिटल समाधान, जो लोगों और कंपनियों को सीधे जोड़कर रियल टाइम में लेनदेन और सहयोग की सुविधा देंगे.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में रूस दुनिया के अग्रणी देशों में है. उन्होंने दावा किया कि वैश्विक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के बड़े हिस्से में रूस की भागीदारी है. इसके अलावा रूस के पास जल और ऊर्जा संसाधनों के प्रबंधन, इंजीनियरिंग और तकनीकी विकास के क्षेत्र में भी मजबूत अनुभव है, जिसकी मांग एशिया और अफ्रीका में लगातार बढ़ रही है.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि चीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सबसे अधिक पेटेंट रखने वाले देशों में शामिल है. उन्होंने चीन को रूस का रणनीतिक साझेदार बताते हुए उसकी तकनीकी उपलब्धियों की सराहना की. इसके साथ ही उन्होंने भारत को आईटी क्षेत्र का अग्रणी खिलाड़ी बताया. उनके अनुसार वैश्विक सॉफ्टवेयर बाजार में भारत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, फाइनेंस, शहरी सेवाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. रूस के कई डिजिटल समाधान अब दुनिया के दर्जनों देशों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि लंबे समय तक पश्चिम को तकनीकी विकास का मुख्य स्रोत माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है. पिछले 25 वर्षों में BRICS देशों ने हाई-टेक निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है और अब वैश्विक आपूर्ति का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा इनके पास है.
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि तकनीकी नेतृत्व भी धीरे-धीरे नए क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो रहा है.
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इसी कारण कई देश अब डॉलर और यूरो पर निर्भरता कम कर रहे हैं. राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ रहा है, वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों का उपयोग हो रहा है और डिजिटल वित्तीय परिसंपत्तियों तथा केंद्रीय बैंकों की डिजिटल मुद्राओं की भूमिका बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि रूस के निर्यात में रूबल की हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. यानी रूस का लगभग दो-तिहाई निर्यात अब अपनी राष्ट्रीय मुद्रा में हो रहा है.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दुनिया को अधिक लचीली, जिम्मेदार और निष्पक्ष वित्तीय व्यवस्था की जरूरत है, जहां विकास को प्रोत्साहन मिले और अनावश्यक प्रतिबंधों का खतरा न हो.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पश्चिमी देशों की सार्वजनिक वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यूरोजोन का सार्वजनिक ऋण 2025 में GDP के 81.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है. कुछ देशों में यह और भी अधिक है. इसके मुकाबले उन्होंने कहा कि रूस का सार्वजनिक ऋण GDP का केवल 16.2 प्रतिशत है. उनके अनुसार यह रूस की आर्थिक स्थिरता और वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां अधिक देश स्वतंत्र आर्थिक निर्णय लेना चाहते हैं और बहुध्रुवीय व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज करने और प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाइयों का असर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर पड़ा है. इससे अमेरिकी डॉलर और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि अब दुनिया के सभी देश यह समझ चुके हैं कि जिस तरह रूस की संपत्तियों तक पहुंच रोकी गई, उसी तरह किसी भी देश को डॉलर या यूरो आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर किया जा सकता है.
राष्ट्रपति पुतिन ने दावा किया कि इसके पीछे असली कारण राजनीतिक मतभेद नहीं बल्कि अनुचित प्रतिस्पर्धा है. उन्होंने कहा कि कभी यूक्रेन, कभी मध्य पूर्व, कभी अफ्रीका और कभी सामाजिक मुद्दों को बहाना बनाया जाता है, लेकिन मूल उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करना होता है.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि आधुनिक विकास का प्रतीक केवल व्यापार नहीं बल्कि विभिन्न बाजारों, तकनीकों, वित्तीय प्रवाह और कारोबारी संस्कृतियों को जोड़ना है. उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्बेकिस्तान तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास और बढ़ते घरेलू बाजार के साथ रूस, मध्य एशिया, दक्षिण एशिया, चीन और मध्य पूर्व के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है. इसी तरह उन्होंने तंजानिया को पूर्वी अफ्रीका में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बताया.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि लंबे समय तक वैश्विक व्यापार, पूंजी और सूचना का प्रवाह कुछ पश्चिमी केंद्रों के माध्यम से होता था. यहां तक कि जब एक यूरेशियाई देश से दूसरे यूरेशियाई देश तक सामान जाता था, तब भी भुगतान, लॉजिस्टिक्स, बीमा और मध्यस्थता तीसरे देशों के संस्थानों के जरिए होती थी. इससे अतिरिक्त लागत और राजनीतिक निर्भरता पैदा होती थी.
उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार अधिक कुशल बन रहा है. राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ रहा है और नए परिवहन गलियारे विकसित किए जा रहे हैं. इनमें उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर, ट्रांस-आर्कटिक परिवहन मार्ग, कैस्पियन सागर, मध्य एशिया, काला सागर और मध्य पूर्व से जुड़ने वाले मार्ग शामिल हैं.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि विश्व बैंक और IMF के अनुमान भी यही बताते हैं कि BRICS देशों की आर्थिक वृद्धि G7 की तुलना में कहीं अधिक तेज रहेगी. G7 की अर्थव्यवस्थाएं जहां सालाना लगभग 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ेंगी, वहीं BRICS देशों की वृद्धि 4 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि निवेश और व्यापार स्वाभाविक रूप से वहीं जाते हैं जहां विकास की गति अधिक होती है. इसी कारण वैश्विक व्यापार और वित्त का केंद्र धीरे-धीरे बदल रहा है और यह प्रक्रिया आने वाले वर्षों तक जारी रहेगी.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि नए विकास केंद्र अपनी विकास यात्रा खुद तय करना चाहते हैं. वे अधिक मूल्यवर्धन, अपने मानक और अपनी क्षमताएं विकसित करना चाहते हैं. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक GDP वृद्धि का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा BRICS देशों से आया है, जबकि G7 देशों का योगदान केवल 18 प्रतिशत रहा है.
पुतिन के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी. इसमें से लगभग 2 प्रतिशत वृद्धि BRICS देशों से आई, जबकि G7 का योगदान केवल 0.8 प्रतिशत रहा. उन्होंने कहा कि क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर BRICS की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी अब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि G7 की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से भी कम रह गई है. उनके अनुसार BRICS ने 2020 में ही G7 को पीछे छोड़ दिया था और यह अंतर लगातार बढ़ रहा है.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि का ढांचा अब नए विकास केंद्रों और ग्लोबल साउथ के देशों के पक्ष में बदल रहा है. उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक वास्तविकता है. जिन देशों की बात की जा रही है, वहां आबादी बढ़ रही है, मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है, उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं और घरेलू बाजार मजबूत हो रहे हैं. नए शहर बसाए जा रहे हैं, सड़कें, ऊर्जा नेटवर्क और डिजिटल ग्रिड बनाए जा रहे हैं. साथ ही वित्तीय, शैक्षणिक और वैज्ञानिक केंद्र भी विकसित हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि दुनिया पहले की तुलना में अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण बन रही है क्योंकि आर्थिक विकास अब ज्यादा देशों तक पहुंच रहा है. इससे उन अरबों लोगों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं जो पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था के किनारे पर खड़े थे.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अब दुनिया एक अधिक व्यापक और बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है. विकास का केंद्र धीरे-धीरे ग्लोबल साउथ और नए उभरते देशों की ओर स्थानांतरित हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक घोषणा नहीं बल्कि एक वास्तविकता है. जिन देशों की बात की जा रही है, वहां आबादी बढ़ रही है, मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है, उद्योगों में तेजी आ रही है और घरेलू बाजार मजबूत हो रहे हैं.
राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार, यही कारण है कि नए शहर बन रहे हैं, नई सड़कें तैयार हो रही हैं और नए आर्थिक अवसर पैदा हो रहे हैं. उनका मानना है कि आने वाले सालों में यही देश वैश्विक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस इन वैश्विक परिवर्तनों को केवल खतरे के रूप में नहीं देखता. उनके अनुसार, इनमें बड़े अवसर भी छिपे हैं और रूस उन्हें व्यावहारिक तथा तेजी से अपनाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने दोहराया कि वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल की सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया एक ऐसे ऊर्ध्वाधर और केंद्रीकृत मॉडल से बाहर निकल रही है जो केवल कुछ देशों के हितों की सेवा करता था.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अब अधिकांश देश इस वास्तविकता को समझ चुके हैं. उद्योगपति, बैंक, किसान, परिवहन कंपनियां और निवेशक देख रहे हैं कि जिन वैश्विक व्यवस्थाओं पर वे निर्भर हैं, वही उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती हैं. इसी वजह से देश अब अपनी तकनीक विकसित कर रहे हैं, अपनी सप्लाई चेन बना रहे हैं और नए संस्थानों की स्थापना कर रहे हैं.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दुनिया में जो बदलाव दिखाई दे रहे हैं, वे किसी सामान्य आर्थिक चक्र का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वैश्विक विकास की पूरी अवधारणा बदल रही है.
उन्होंने कहा कि दशकों तक वैश्विक व्यवस्था कुछ सीमित वित्तीय केंद्रों, तकनीकी समाधानों, लॉजिस्टिक हब, रेटिंग एजेंसियों और आरक्षित मुद्राओं के इर्द-गिर्द घूमती रही. इस व्यवस्था को सार्वभौमिक और निष्पक्ष बताया गया, लेकिन व्यवहार में इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव और अनुचित प्रतिस्पर्धा के साधन के रूप में किया गया.
पुतिन ने कहा कि कई बार भुगतान व्यवस्था, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और यहां तक कि सूचना तक पहुंच को भी उन देशों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया जो अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेना चाहते थे.
अपने भाषण में राष्ट्रपति पुतिन ने यूरोपीय नौकरशाही की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि आक्रामक बयानबाजी और दूरदर्शिता की कमी वाली नीतियां यूरोप की वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिति को कमजोर कर रही हैं. उनके अनुसार, इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय अभिजात वर्ग अराजकता को बढ़ावा दे रहा है और अधिक से अधिक देशों को इस स्थिति में धकेलने की कोशिश कर रहा है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने संबोधन में कहा कि रूस उन सभी देशों, उद्यमियों और उद्योगों के साथ काम करने के लिए हमेशा तैयार है जो समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर सहयोग करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की बात सुनना, एक-दूसरे के हितों को समझना और साझा समाधान तक पहुंचना ही संतुलित विकास का रास्ता है.
पुतिन ने कहा कि यही दृष्टिकोण आधुनिक दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान खोजने में भी मदद कर सकता है. उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय ऊर्जा बाजारों में झटकों और कई क्षेत्रों में बढ़ते तनाव को देख रही है. विशेष रूप से उन्होंने मध्य पूर्व की स्थिति का उल्लेख किया.
आजतक संवाददाता गीता मोहन ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या हम ऐसी विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं जहां देश अब दूसरों के माध्यम से नहीं बोलना चाहते, बल्कि स्वयं अपनी आवाज दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं.
आजतक संवाददाता गीता मोहन ने कहा कि चर्चा इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या ब्रिक्स और दक्षिण-दक्षिण सहयोग केवल राजनीतिक नारों तक सीमित रहेंगे या वे वास्तविक आर्थिक साधनों में बदल पाएंगे. क्या वैकल्पिक भुगतान प्रणालियां, नए व्यापारिक गलियारे, ऊर्जा साझेदारियां और तकनीकी सहयोग ग्लोबल साउथ को वास्तविक ताकत और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता दे पाएंगे?
संवाददाता गीता मोहन ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश बिना किसी खेमे का हिस्सा बने, बिना प्रतिबंधों के दबाव में आए और बिना बाहरी दबाव के अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकते हैं?
क्या बहुध्रुवीय दुनिया वास्तव में अधिक न्यायपूर्ण होगी या फिर केवल एक शक्ति केंद्र की जगह कई प्रतिस्पर्धी शक्ति केंद्र ले लेंगे?
संवाददाता गीता मोहन ने कहा कि हमारे सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या हम केवल शक्ति के पुनर्वितरण को देख रहे हैं या फिर वास्तव में एक अधिक न्यायसंगत विश्व व्यवस्था के जन्म के साक्षी बन रहे हैं? दुनिया को उपदेश देने, दबाव बनाने और धमकाने का जो दौर रहा है, उसे अब गंभीर चुनौती मिल रही है. लेकिन साथ ही यह भी सच है कि स्वतंत्रता आसान नहीं होती. रणनीतिक स्वायत्तता की भी अपनी कीमत होती है. इसलिए आज की चर्चा केवल भू-राजनीति की नहीं है. यह संप्रभुता की कीमत पर भी चर्चा है. यह वही विषय है जिस पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बार-बार जोर देते रहे हैं.
आजतक संवाददाता गीता मोहन ने कहा कि यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है. उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों तक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था कुछ शक्तिशाली देशों, चुनिंदा संस्थानों और तय नियमों के आधार पर संचालित होती रही, लेकिन अब एक नई वैश्विक आर्थिक संरचना उभर रही है.
संवाददाता गीता मोहन ने कहा कि यह नई व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक विविधतापूर्ण, अधिक प्रतिनिधित्व वाली और व्यापक भागीदारी पर आधारित है. उनके मुताबिक, आज दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का केंद्र बदल रहा है और नए क्षेत्र तथा नए देश वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहे हैं.

दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है. संसाधनों को लेकर बढ़ते संघर्ष, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच रूस ने खुद को ऐसी शक्ति के रूप में पेश किया है, जो संवाद और स्थिरता का रास्ता दिखा सकती है.
वीडियो संदेश में कहा गया कि इतिहास में कई ऐसे दौर आए जब दुनिया अराजकता और संघर्ष के बीच फंस गई. अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध के समय समुद्री व्यापार और तटस्थ देशों के अधिकारों को लेकर चुनौतियां सामने आईं. उस दौर में रूस की महारानी कैथरीन ने तटस्थ नौवहन की सुरक्षा के लिए “डिक्लेरेशन ऑफ न्यूट्रैलिटी” की पहल की, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया.
इस 'ग्लोबल हाई टेबल' पर दुनिया के चार बड़े दिग्गज - रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव और तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन एक साथ मंच साझा करेंगे.
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में इंडिया टुडे ग्रुप शुक्रवार को हाई-प्रोफाइल लीडरशिप प्लेनरी सत्र की मेजबानी करेगा. इस सत्र में दुनिया के कई प्रमुख नेता एक साथ मंच साझा करेंगे.