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अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचीं फ्रेंच वाइन की 12 बोतलें पर इसे पीएंगे नहीं अंतरिक्षयात्री

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में फ्रांस की बेहतरीन और उच्च गुणवत्ता वाली बोर्दो रेड वाइन पहुंचाई गई है. हालांकि, यह शराब अंतरिक्षयात्रियों के पीने के लिए नहीं है. अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचाई गईं रेड वाइन की ये 12 बोतलें एक साल तक वहां रखी जाएंगी.

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स्पेस स्टेशन पर भेजने से पहले वाइन की बोतल की पैकिंग करते वैज्ञानिक. (फोटोःएपी)
स्पेस स्टेशन पर भेजने से पहले वाइन की बोतल की पैकिंग करते वैज्ञानिक. (फोटोःएपी)

  • एक साल तक अंतरिक्ष स्टेशन में रहेगी शराब
  • फिर पृथ्वी पर वापस लाकर किया जाएगा शोध

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station- ISS) में फ्रांस की बेहतरीन और उच्च गुणवत्ता वाली बोर्दो रेड वाइन पहुंचाई गई है. हालांकि, यह शराब अंतरिक्षयात्रियों के पीने के लिए नहीं है. अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचाई गईं रेड वाइन की ये 12 बोतलें एक साल तक वहां रखी जाएंगी. वैज्ञानिक यह पता करना चाहते हैं कि अंतरिक्ष में रेड वाइन की बोतलों पर क्या असर पड़ता है? अगले तीन सालों तक छह अंतरिक्ष मिशन में ये शराब की बोतलें भेजी जाएंगी. ताकि विस्तृत अध्ययन किया जा सकेगा.

वैज्ञानिक यह अध्ययन करेंगे कि एक साल तक इन बोतलों को अंतरिक्ष स्टेशन में शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) यानी भारहीनता और अंतरिक्षीय विकिरण (Space Radiation) के बीच रखने पर क्या होता है? क्या उनके स्वाद में बदलाव आता है? क्या वे खराब हो जाएंगी? या उनकी गुणवत्ता में और इजाफा होता है. अगर इन बोतलों में भरी शराब के स्वाद और गुणवत्ता में इजाफा होता है तो शराब उद्योग में एक नई क्रांति आएगी. साथ ही आपको अंतरिक्ष में रखी गई शराब की बोतल पीने को मिल सकती है.

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4 नवंबर को अंतरिक्ष स्टेशन पहुंची रेड वाइन की बोतलें

शनिवार यानी 2 नवंबर को वर्जीनिया से नॉर्थरोप ग्रुमेन के स्पेस कैप्सूल से इन बोतलों को अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना किया गया था. जो सोमवार यानी 4 नवंबर को अंतरिक्ष स्टेशन पहुंची. इन बोतलों को एक खास धातु के डिब्बे में बंद करके अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा गया था, ताकि वे रास्ते में टूटे नहीं. रेड वाइन पर चल रहे अध्ययन में फ्रांस की बोर्दो यूनिवर्सिटी, जर्मनी स्थित बेवेरिया यूनिवर्सटी और लग्जमबर्ग स्थित एक स्टार्टअप स्पेस कार्गो अनलिमिटेड शामिल हैं.

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रेड वाइन की बोतलों पर किस तरह का अध्ययन किया जाएगा

एर्लांगेन-न्यूरेमबर्ग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इस अध्ययन से जुड़े माइकल लेबर्ट ने बताया कि इस शराब के बनाने में यीस्ट एवं जीवाणुओं दोनों का इस्तेमाल किया गया है. इसमें विभिन्न प्रकार की रासायनिक प्रक्रियाएं शामिल हैं. इसीलिए इसका अंतरिक्ष में अध्ययन सही है. अंतरिक्ष में रखी गई शराब की तुलना पृथ्वी पर इतने ही समय के लिए रखी गई बोर्दो की शराब से की जाएगी. ताकि, यह पता चल सके कि पृथ्वी पर रखी शराब बेहतर है या अंतरिक्ष में रखी गई. वहीं, स्पेस कार्गो अनलिमिटेड के सह संस्थापक निकोलस गौम ने कहा कि यह एक बार किया जाने वाला जीवनभर का साहसिक कार्य है.

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