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आबू धाबी की जेल में बंद इस बेकसूर भारतीय को चाहिए 2 लाख दिरहम

संयुक्त अरब अमीरात की एक जेल में चार साल से बंद एक भारतीय ने अपनी रिहाई के लिए गुहार लगाई है. उसे जेल से बाहर निकलने के लिए दो लाख दिरहम (लगभग 33 लाख रुपये) चाहिए. यह खबर वहां के अखबार गल्फ न्यूज ने दी है.

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दुबई स्थित एक जेल की तस्वीर
दुबई स्थित एक जेल की तस्वीर

संयुक्त अरब अमीरात की एक जेल में चार साल से बंद एक भारतीय ने अपनी रिहाई के लिए गुहार लगाई है. उसे जेल से बाहर निकलने के लिए दो लाख दिरहम (लगभग 33 लाख रुपये) चाहिए. यह खबर वहां के अखबार गल्फ न्यूज ने दी है.

अखबार के मुताबिक अनजाने में हुई एक घटना का उसे बहुत बड़ा परिणाम भुगतना पड़ रहा है और उस पर हत्या का मुकदमा चल रहा है. उसे जेल से रिहा होने के लिए तीन लाख दिरहम चाहिए जिसमें से एक एनजीओ ने एक लाख दिरहम देने की घोषणा की है.

कहानी कुछ यूं है. केरल के रहने वाले अब्दुल नौशाद कन्नकुजियिल की गर्लफ्रेंड की 2010 में अजीबोगरीब घटना में मौत हो गई. बताया जाता है कि अब्दुल अल ऐन में वहां के एक बड़े आदमी के यहां ड्राइवर के रूप में नौकरी करता था. वहां इंडोनेशिया की रहने वाली सोमा से उसका प्यार हो गया. एक दिन दोनों ने बाहर घूमने का मन बनाया. उन्होंने एक मिनीवैन ली और निकल गए रोमांटिक सैर करने. लेकिन भाग्य को कुछ और मंजूर था. जब वे मेन रोड पर जा रहे थे तो सोमा ने देखा कि उनकी मिनीवैन के साथ वाली कार पर उनका मालिक सवार है. उसे देखकर वह इतना घबरा गई कि चलती मिनीवैन से कूद पड़ी और वहीं उसकी मौत हो गई. नौशाद गिरफ्तार हो गया. उसे जेल में ठूंस दिया गया. उस पर दो आरोप लगाया गए. पहला तो यह कि उसके सोमा से नाजायज ताल्लुकात थे और दूसरा मौत का.

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संयुक्त अरब अमीरात के नियमों के मुताबिक उसे मौत का जिम्मेदार माना गया. मामला सोमा के परिवार वालों के पास गया जिन्होंने वहां के कानून के मुताबिक ब्लड मनी मांगा. उन्होंने शुरू में सात लाख दिरहम मांगे लेकिन बाद में तीन लाख पर तैयार हो गए. इसमें से रेड क्रेसेंट नाम की एक स्वंयसेवी संस्था ने एक लाख दिरहम देने की मंजूरी दे दी. लेकिन अब्दुल के परिवार वाले गरीब हैं और 33 लाख रुपये की रकम जुटा नहीं पा रहे हैं. नतीजतन वह वहां की जेल में बंद है. नाजायज रिश्ते वाले मामले में उसे एक साल दो महीने की सजा हुई और अब अधिकारियों ने उस बंद रखा हुआ है.

अब्दुल का कहना है कि यह मेरा दुर्भाग्य है, मैं कोई अपराधी नहीं हूं. उसने कहा कि उसे मुक्त जीवन जीने का हक है. उसने कहा कि मैंने कोई गलत काम नहीं किया.

इस मामले में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने इंडोनेशियाई अधिकारियों से बातचीत की. पिछले साल ही उन्हें सोमा के परिवार का पता चला जिन्होंने बडी़ मोटी रकम मांगी. अब वे तीन लाख दिरहम पर अटके हुए हैं. वैसे वहां के कानून के मुताबिक उन्हें सिर्फ एक लाख दिरहम ही ब्लड मनी के रूप में मिल सकते हैं.

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दिलचस्प बात यह है कि सोमा की मौत के बदले मुआवजा मिलने की खबर से उसके कई रिश्तेदार इंडोनेशिया में खड़े हो गए हैं. अब अधिकारी पता लग रहे हैं कि उसका निकट संबंधी कौन है?

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