चीन ने गुरुवार को हॉन्गकॉन्ग को कब्जाने और उसकी स्वायत्तता खत्म करने के लिए नेशनल सिक्योरिटी बिल के मसौदे को पारित कर दिया. चीन के इस कानून की हॉन्गकॉन्ग समेत दुनियाभर में कड़ी आलोचना हो रही है. इस कानून के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन भी देखने को मिल चुके हैं.
वहीं, नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने नेशनल सिक्युरिटी बिल की समीक्षा की. इस कानून में चार तरह के अपराधों को शामिल किया गया है, जिनमें उत्तराधिकार से जुड़े अपराध, राज्य शक्ति के मामले, स्थानीय आतंकी गतिविधियां और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए विदेशी या बाहरी शक्तियों के साथ सहयोग करना जैसे अपराध शामिल हैं.
इस बिल में न इन अपराधों की परिभाषा विस्तार से दी गई है और न ही सजा का विवरण दिया गया है. अभी तक यह भी साफ नहीं किया गया है कि आखिर इस कानून का फाइनल संस्करण कब पारित किया जाएगा. हालांकि चीन इस बात को बार-बार कह चुका है कि वह तमाम आलोचनाओं के बावजूद यह कानून बनाएगा और लागू करेगा.
इसे भी पढ़ेंः चीन को घेरने के लिए बनाया चक्रव्यूह! किसी भी चाल को कामयाब नहीं होने देगा भारत
यह कानून पहले हॉन्गकॉन्ग की विधायिका से पारित कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्थानीय विरोध प्रदर्शन के चलते ऐसा नहीं हो पाया था. इसके बाद इस कानून को राष्ट्रीय स्तर पर बनाने के लिए कदम उठाया गया. इस कानून की आलोचना करने वाले लोगों का कहना है कि यह कानून अभिव्यक्ति की आजादी और विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों को सीमित कर देगा.
यह भी पढ़ें: ग्लोबल पावर बनने की हनक में तो नहीं कर रहा चीन ऐसा दुस्साहस...
पिछले साल हॉन्गकॉन्ग में सरकार विरोधी प्रदर्शन देखने को मिले थे. इस दौरान हिंसा भी हुई थी, जिसके बाद चीन की सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी कानून लाने का फैसला किया. वहीं, अमेरिका पहले ही कह चुका है कि अगर चीन इस कानून को पारित कर देता है, तो हॉन्गकॉन्ग को दिए गए विशेषाधिकार समाप्त कर दिए जाएंगे. इसके अलावा ब्रिटेन ने कहा कि अगर चीन इस कानून को पारित करता है, तो वह हॉन्गकॉन्ग के लोगों पासपोर्ट देगा और नागरिकता देने का रास्ता खोलेगा.