भारत और ईरान ने मिलकर चाबहार जाहेदान रेल लिंक प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अभी तक इसको जमीन पर नहीं उतरा जा सका है. जब मीडिया में खबर आई कि ईरान ने चाबहार जाहेदान रेल लिंक प्रोजेक्ट को अकेले ही पूरा करने का फैसला ले लिया है और भारत को बाहर कर दिया है, तो कई तरह के सवाल उठने लगे. हालांकि ईरान ने बाद में यह भी साफ कर दिया कि इस प्रोजेक्ट में भारत शामिल हो सकता है, उसके लिए रास्ते खुले हुए हैं.
अब आजतक को पता चला है कि ईरान की कुछ कंपनियों को इस प्रोजेक्ट में शामिल करने पर भारत को आपत्ति है. हालांकि ईरान इन्हीं कंपनियों को इस प्रोजेक्ट का काम दे रहा है, जिसके चलते भारत अब तक चाबहार जाहेदान रेल लिंक प्रोजेक्ट में शामिल नहीं हुआ है.
सूत्रों के मुताबिक ईरान इस प्रोजेक्ट का काम खातम-अल-अनबिया कंस्ट्रक्शन कंपनी से करवाना चाहता है, जबकि भारत को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (IRGC) की इस कंपनी के प्रोजेक्ट में शामिल होने से दिक्कत है.
इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स पर प्रतिबंध लगा रखा है. लिहाजा भारत आईआरजीसी की कंपनियों को इस प्रोजेक्ट से दूर रखना चाहता है. भारत यह कतई नहीं चाहता है कि अमेरिकी प्रतिबंध इस प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की समस्या बने. आपको बता दें कि खातम-अल-अनबिया कंस्ट्रक्शन कंपनी का नियंत्रण इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स के पास है.
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वहीं, चाबहार जाहेदान रेल लिंक प्रोजेक्ट में भारत को शामिल करने को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है. जब यह खबर सामने आई कि भारत के बिना ईरान अकेले ही चाबहार जाहेदान रेल लिंक प्रोजेक्ट के काम को पूरा करेगा, तो ईरान के रेलमंत्री ने साफ कहा था कि भारत और ईरान इस प्रोजेक्ट पर सहयोग जारी रखेंगे.
सोमवार को ईरान में भारतीय राजदूत गद्दाम धर्मेंद्र के साथ बैठक के बाद ईरानी रेलवे प्रमुख सईद रसूली ने कहा था, 'दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के इतिहास और मौजूदा क्षमता को देखते हुए ईरान और भारत रेलवे ट्रांसपोर्ट में साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं. खासतौर पर चाबहार रेलवे लाइन को लेकर क्योंकि यह दोनों देशों के विकास से जुड़ा है.'
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