बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को भारत का आंतरिक मामला बताया है. गल्फ न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह बात कही. इंटरव्यू में शेख हसीना ने सीएए पर कहा कि हम यह नहीं समझते कि (भारत सरकार ने) ऐसा क्यों किया. यह जरूरी नहीं था.
शेख हसीना का यह बयान बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए.के. अब्दुल मोमेन के बयान के बाद आया है. मोमेन ने कहा था कि सीएए और एनआरसी भारत के आंतरिक मुद्दे हैं, लेकिन चिंता व्यक्त की थी कि देश में किसी भी अनिश्चितता से उसके पड़ोसियों को प्रभावित होने की संभावना होती है.
Gulf News: Bangladesh has always maintained that the CAA and NRC are internal matters of India- Bangladesh Prime Minister Sheikh Hasina (file pic) pic.twitter.com/xOESE3L61J
— ANI (@ANI) January 19, 2020
इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी ने कहा था कि भारत में नागरिकता अधिनियम, 1955 में हालिया संशोधन के तहत मुस्लिमों के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर बांग्लादेश भी चिंतित है. अल्वी ने कहा, "मैंने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद से बात की है. वे भारत के बिहार में मुस्लिमों को लेकर और उनके देश में प्रवासियों के आने के डर से चिंतित हैं."
बीते दिसंबर महीने में भी बांग्लादेश की तरफ से सीएए पर बयान आया था. बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के डायरेक्टर जनरल (डीजी) मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया था. उन्होंने कहा कि एनआरसी भारत सरकार का एक आंतरिक मामला है. शफीनुल इस्लाम ने कहा कि लोग परिवारों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए अलग-अलग कारणों से सीमा पार करते हैं. हमने भारत की ओर से किसी भी बांग्लादेशी को वापस हासिल नहीं किया है.
उन्होंने कहा कि जितने भी बांग्लादेशी नागरिक भारत आए थे और वापस बांग्लादेश गए हैं, वे सभी अपनी मर्जी से वापस आ गए हैं. लगभग 300 लोगों को बिना दस्तावेजों के पकड़ा गया है.