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मथुरा में अनोखा प्रदर्शन: यमुना प्रदूषण के खिलाफ 'कॉकरोच' बनकर नगर निगम दफ्तर पहुंचा युवक, जमकर नाचा

सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' की चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक अनोखा विरोध प्रदर्शन सामने आया है. यहां वृंदावन में यमुना नदी के प्रदूषण और नालों को न रोके जाने से आहत एक युवक अनोखा भेष धारण कर सीधे नगर निगम कार्यालय पहुंच गया.

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मथुरा नगर निगम के दफ्तर के बाहर अनोखा प्रोटेस्ट (Photo- ITG)
मथुरा नगर निगम के दफ्तर के बाहर अनोखा प्रोटेस्ट (Photo- ITG)

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से 'कॉकरोच जनता पार्टी' चर्चा में है. इसको लेकर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. इस बीच के मथुरा जिले के वृंदावन निवासी सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने अनोखा कदम उठाया. शुक्रवार को वो यमुना नदी में गिरने वाले खुले नालों को रोके जाने और पानी के प्रदूषित होने की मांग को लेकर 'कॉकरोच' का भेष धारण करके नगर निगम कार्यालय पहुंच गए. उन्होंने कार्यालय के बाहर पहुंचकर अनोखे अंदाज में नाचना शुरू कर दिया, जिसे देखने के लिए आसपास के स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई. 

दरअसल, वृंदावन में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण बोर्ड की निगरानी के बावजूद यमुना में लगातार नाले गिर रहे हैं. दीपक ने अधिकारियों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ताओं को 'कॉकरोच' कहे जाने के विरोध में यह कदम उठाया.

यमुना प्रदूषण से क्षुब्ध होकर उठाया कदम

दीपक शर्मा वृंदावन में पवित्र यमुना नदी के लगातार प्रदूषित हो रहे जल और उसमें बेधड़क गिरते गंदे नालों की स्थिति को देखकर लंबे समय से काफी क्षुब्ध थे. इसी समस्या की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने यह अजीबोगरीब तरीका अपनाया. तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे यह युवक कॉकरोच की तरह सजकर दफ्तर के गेट पर पहुंचा.

'समस्या उठाने पर हमें कॉकरोच कहा जाता है'

कॉकरोच का भेष धारण करने की वजह बताते हुए दीपक शर्मा ने कहा कि जब हम जैसे सामाजिक कार्यकर्ता जनता की जायज समस्याओं को उच्च पदों पर बैठे पदाधिकारियों के सामने रखते हैं, तो हमें 'कॉकरोच' कहकर संबोधित किया जाता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी पवित्र नदी में खुलेआम प्रदूषण फैलाना पूरी तरह गलत है.

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बोर्ड की निगरानी के बाद भी नहीं रुक रहे नाले

दीपक शर्मा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण बोर्ड इन सभी गतिविधियों की निगरानी के लिए ही बने हैं, लेकिन इसके बावजूद वृंदावन में खुलेआम नाले गिर रहे हैं. जब यह कड़वा तथ्य हम जनता के सामने लाते हैं, तो हमारा अपमान किया जाता है.

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