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खामोश हुई सियासी जगत की एक दबंग आवाज

मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जमुना देवी के निधन के साथ सियासी जगत की वह दबंग आवाज भी खामोश हो गयी, जो प्रदेश के संसदीय गलियारे में 58 साल से गूंज रही थी. उन्हें ‘सत्ता, सदन और संगठन’ का लम्बा तजुर्बा हासिल था.

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मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जमुना देवी के निधन के साथ सियासी जगत की वह दबंग आवाज भी खामोश हो गयी, जो प्रदेश के संसदीय गलियारे में 58 साल से गूंज रही थी. उन्हें ‘सत्ता, सदन और संगठन’ का लम्बा तजुर्बा हासिल था.

कैंसर से पीड़ित जमुना देवी का शुक्रवार सुबह यहां एक निजी नर्सिंग में निधन हो गया.

प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले के सरदारपुर में 19 नवंबर 1929 को जन्मी जमुना देवी 1952 में तत्कालीन मध्य भारत विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुई थीं. वर्ष 1962 में वह लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद के निचले सदन में पहुंच गयीं.

जमुना देवी वर्ष 1964 से मध्यप्रदेश कांग्रेस समिति की लगातार सदस्य रहीं. वर्ष 1978.81 के बीच उन्होंने राज्यसभा में प्रदेश की नुमाइंदगी की.

वर्ष 1985 में जमुना देवी आठवीं विधानसभा की सदस्य चुनी गयीं और उन्होंने प्रदेश मंत्रिमंडल में आदिम जाति और अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दायित्व संभाला.

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वर्ष 1993 में वह दसवीं विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुइ’ और समाज कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री के रूप में शपथ ली. वर्ष 1998 में ग्यारहवीं विधानसभा की सदस्य चुनी गयी जमुना देवी कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार के दो उपमुख्यमंत्रियों में शामिल रहीं. {mospagebreak}

जमुना देवी की गिनती प्रदेश के सबसे अनुभवी विधायकों और आदिवासी समुदाय के वरिष्ठ नेताओं में होती थी. वर्ष 2003 में प्रदेश में भाजपा की जबर्दस्त लहर के बावजूद कांग्रेस की इस आला नेता ने एक बार फिर चुनाव जीता और बारहवीं विधानसभा के सदस्यों की कतार में शामिल हो गयीं. इसी वर्ष उन्होंने संसदीय जीवन में 50 साल पूरे किये और उन्हें ‘संसदीय जीवन सम्मान’ से नवाजा गया.

जमुना देवी 16 दिसंबर 2003 से 11 दिसंबर 2008 तक प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहीं. वर्ष 2008 में धार की कुक्षी सीट से वह चुनाव जीतकर छठी बार विधायक बनीं. सात जनवरी 2009 से उन्होंने लगातार दूसरी बार प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी संभाली.

विधानसभा में अलग.अलग मुद्दों पर विपक्ष के संघर्ष की अगुवाई करने वाली 80 वर्षीय जमुना देवी पेट के कैंसर से नहीं जीत सकीं. इंदौर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने शुक्रवार सुबह दम तोड़ दिया. पिछले चार महीनों से वह खासी बीमार चल रही थीं.

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