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खाद्य मुद्रास्फीति 6 साल के न्यूनतम स्तर पर

सब्जी, प्याज, आलू और गेहूं जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमत में कमी के साथ खाद्य मुद्रास्फीति 17 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान गिर कर 0.42 फीसदी पर आ गयी. यह छह साल में खाद्य मुद्रास्फीति का न्यूनतम स्तर है.

खाद्य मुद्रास्फीति  न्यूनतम स्तर पर खाद्य मुद्रास्फीति न्यूनतम स्तर पर

सब्जी, प्याज, आलू और गेहूं जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमत में कमी के साथ खाद्य मुद्रास्फीति 17 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान गिर कर 0.42 फीसदी पर आ गयी. यह छह साल में खाद्य मुद्रास्फीति का न्यूनतम स्तर है.

खाद्य मुद्रास्फीति में दिख रही तीव्र गिरावट में तुलनात्मक आधार का भी प्रभाव है, क्योंकि पिछले साल इसी समय खाने-पीने की चीजों के दामों में काफी बड़ा उछाल आया था.

थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति इससे पिछले सप्ताह 1.81 फीसद और पिछले साल इसी दौरान 15.48 फीसदी पर थी.

ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक प्याज सालाना स्तर पर 59.04 फीसद सस्ता हुआ, जबकि आलू की कीमत 33.76 फीसद कम हुई. गेहूं की कीमत भी 3.30 फीसदी कम हुई. कुल मिलाकर 17 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान सब्जियां 36.02 फीसद सस्ती हुईं.

विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर के पहले सप्ताह तक दहाई अंक पर बरकरार खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़ों में भारी गिरावट हुई जिससे सरकार और रिजर्व बैंक दोनों को नीतिगत मोर्चे पर काफी राहत मिली. खाद्य मुद्रास्फीति पिछले दो साल से कफी ऊंचे चल रही थी.

कीमतों के मौजूदा रुझान को देखते हुए आरबीआई जनवरी में मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा के समय मुख्य ब्याज दरों में कटौती करने पर विचार कर सकता है. हालांकि इस दौरान अन्य खाद्य उत्पाद सालाना स्तर पर मंहगे हुए. इनमें दूध, मांस और दाल जैदे प्रोटीन के स्रोत वाले खाद्यपदाथरें की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी आयी है.

समीक्षाधीन अवधि में दालें एक साल पहले की तुलना में 14.07 फीसद मंहगी हुई हैं जबकि दूध 11.30 फीसद और अंडे, मांस और मछली 11.56 फीसद मंहगे हुए. फल सालाना स्तर पर 8.46 फीसद मंहगा हुआ जबकि अनाज की कीमत 2.15 फीसद बढ़ी.

समीक्षाधीन अवधि में प्राथमिक उत्पाद खंड की मुद्रास्फीति 2.70 फीसद रही जो पिछले सप्ताह 3.78 फीसद पर थी. थोक मूल्य सूचकांक में प्राथमिक उत्पादों का योगदान 20 फीसद है.

प्राथमिक वस्तुओं में गैर खाद्य वस्तुवर्ग की मुद्रास्फीति 17 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान 0.28 फीसद रही जबकि 10 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 1.37 फीसद थी. ईंधन और बिजली वर्ग की मुद्रास्फीति 17 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान 14.37 फीसद पर थी जबकि इसके पिछले सप्ताह 15.24 फीसद पर थी.

सकल मुद्रास्फीति दिसंबर 2010 से नौ फीसद के ऊपर बरकार थी. इस साल नवंबर में सकल मुद्रास्फीति 9.11 फीसद पर थी. आरबीआई ने मांग पर नियंत्रण और मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए मार्च 2010 से ब्याज दरों में 13 बार बढ़ोतरी की.

मौद्रिक नीति की पिछले महीने हुई दूसरी तिमाही समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने कहा था कि उसे दिसंबर तक मुद्रास्फीति के उच्च स्तर पर बने रहने की उम्मीद है लेकिन मार्च 2012 तक यह गिरकर सात फीसद पर पहुंच जाएगी.

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