महाराष्ट्र के बीड जिले में गन्ने की फसल काटने वाली कई महिलाएं अपनी कोख निकलवा रही हैं. बताया जाता है कि ये महिलाएं ऐसा इसलिए कर रही हैं ताकि वो हर दिन खेतों में काम कर सकें. महिलाओं का कहना है कि पीरियड्स के दिनों में वो खेती नहीं कर पाती हैं जिस वजह से उन्होंने कोख निकलवा दी. (फोटो - सैयद मोहसिन खान)
लेकिन इस मामले का दूसरा पहलू है आर्थिक तंगी. गन्ने के खेत में फसल काटने वाली महिलाओं का कहना है कि पीरियड्स के दिनों में काम पर नहीं आने पर उनका ठेकेदार पैसे काट लेता है. इसलिए मजबूरन उन्हें अपनी कोख निकलवानी पड़ी. (फोटो - सैयद मोहसिन खान)
साथ ही महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ा. जिस वजह से उनका खर्च हर माह बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए महिलाओं के बीच कोख निकालने का दौर चल पड़ा है. (फोटो - सैयद मोहसिन खान)
वहीं, जानकारों का कहना है कि कोख निकालने का गोरखधंधा जोरों-शोरों से चल रहा. कुछ डॉक्टर पैसों की लालच में महिलाओं की कोख निकाल देते हैं. यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं की कोख निकाली गई है या तो वो शादीशुदा हैं और उनके दो से तीन बच्चे हैं. (फोटो - सैयद मोहसिन खान)
उधर, जिले के डॉक्टरों का कहना है कि, मजदूरी करने की वजह से महिलाएं अपनी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रख पाती हैं, जिसके चलते उन्हें गर्भाशय की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. (फोटो - सैयद मोहसिन खान)
बीड की सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा तोकले ने बताया, "पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करने से कई महिलाओं को गर्भाशय का इंफेक्शन हो जाता है, जो कुछ समय के बाद कैंसर का रूप भी ले लेता है. कैंसर का इलाज कराने जब महिलाएं हॉस्पिटल पहुंचती हैं, तो यहां के कुछ डॉक्टर रुपयों के लालच में बीमारी का सही इलाज करने के बजाए कैंसर से मौत का डर दिखाकर गर्भाशय ही निकाल देते हैं और महिलाएं मौत के डर से अपना गर्भाशय निकलवाने के लिए मजबूर हो जाती हैं." (फोटो - सैयद मोहसिन खान)
वैसे कोख निकालने की खबर के सामने आने के बाद महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग (MSCW) मामले की जांच कर रहे हैं. साथ ही कई एनजीओ भी महिलाओं के साथ हो रही बर्बरता को रोकने के लिए काम कर रहे हैं. (फोटो - सैयद मोहसिन खान)