लेह-लद्दाख और लाहौल स्पीति के बीच बन रही रोहतांग सुरंग अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह से पैदल आवाजाही के लिए खुल जाएगी. यहां लाहौल की तरफ टनल के नॉर्थ पोर्टल से सड़क से बर्फ हटाने का काम चल रहा है. एक सप्ताह में इसके बहाल होने की उम्मीद है.
एक हिंदी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बीआरओ के चीफ इंजीनियर से मुलाकात के बाद डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि चुनाव आयोग ने रोहतांग सुरंग के जरिये लाहौल-स्पीति के लोगों की आवाजाही शुरू करने की अनुमति दी है. अभी बर्फ हटाने का काम चल रहा है. अप्रैल के दूसरे सप्ताह से आवाजाही शुरू होगी. (प्रतीकात्मक फोटो)
मालूम हो कि रोहतांग सुरंग 8.8 किलोमीटर लंबी है. यह देश की सबसे ऊंची सड़क लेह-मनाली और लाहौल स्पीति को जोड़ती है. 1983 में रोहतांग सुरंग परियोजना पर काम 2010 में शुरू हुआ था और 2019 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जो लगभग अब पूरा हो चुका है. (प्रतीकात्मक फोटो)
गौरतलब है कि रोहतांग टनल के खुलने से दिल्ली के लेह-लद्दाख और लाहौल स्पीति के बीच सफर आसान हो जाएगा.
इस सुरंग को आधुनिक और एडवांस टेक्नोलॉजी से बनाया गया है. (प्रतीकात्मक फोटो)
यह सुरंग चीन और पाकिस्तान सीमा तक भारत सेना की पहुंच आसान कर देगी. क्योंकि लेह-मनाली राजमार्ग पाकिस्तान और चीन दोनों की सीमा से लगा हुआ है. ऐसे में रणनीतिक लद्दाख क्षेत्र में भारत की पकड़ और मजबूत होगी. (प्रतीकात्मक फोटो)
हिमालय की पीर पांजाल पर्वत श्रेणी में बनी रोहतांग सुरंग जमीन से तीन किमी यानी कि लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर है. (प्रतीकात्मक फोटो)
सबसे ख़ास बात तो यह कि इस सुरंग से मनाली से लाहौल स्पीति और लेह लद्दाख पहुंचने का सफर 5 से 6 घंटे तक कम हो जाएगा. आमतौर पर लाहौल स्पीति इलाका हर साल भारी बर्फबारी के चलते नवंबर से अप्रैल तक बंद रहता है. लेकिन अब इस सुरंग के शुरू होने से लोग 12 माह यहां से आ जा सकेंगे. (प्रतीकात्मक फोटो)
बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) का भी यह मानना है कि इस सुरंग से भारतीय सीमा की चौकसी और भारतीय सेना की मुस्तैदी और ताकत काफी बढ़ जाएगी. (प्रतीकात्मक फोटो)