स्मार्टफोन के इस जमाने में उसकी जल्दी-जल्दी बैट्री खत्म होना लोगों के लिए किसी समस्या से कम नहीं है. लेकिन लोग इससे निजात पाने के लिए ही पावर बैंक खरीदते हैं ताकि कहीं भी कभी भी अपने फोन को फिर से चार्ज कर दुनिया से जुड़े रहें. अपने फोन को चार्ज करने के लिए लोग हजारों रुपये देकर नामी कंपनियों का पावर बैंक खरीदते हैं लेकिन जब पावर बैंक के नाम पर आपको आटे से चिपका एक नकली बैट्री वाला डब्बा पकड़ा दिया जाए तो सोचिए आप कैसा महसूस करेंगे.
ऐसा ही हुआ एक शख्स के साथ जब उसने ट्रेन में यात्रा करने के दौरान अपने मोबाइल फोन को चार्ज करने के लिए चर्चित रेडमी (mi) कंपनी का पावर बैंक खरीदा. उस शख्स को लगा कि इससे उसकी मुसीबत खत्म हो जाएगी और वो जब चाहेगा इससे अपना फोन चार्ज कर लेगा. लेकिन जब उसके सामने नकली पावर बैंक की सच्चाई खुली तो वो दंग रह गया. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
दरअसल पावर बैंक खरीदने वाले शख्स ने जब उससे फोन चार्ज करना शुरू किया तो थोड़ी देर बाद ही फोन चार्ज होना बंद हो गया जिसके बाद उसने पावर बैंक को खोलकर देखा तो सारी सच्चाई बाहर आ गई. दरअसल किसी ने उसे रेडमी कंपनी के पावर बैंक के नाम पर उसका कवर बेच दिया था जिसके ऊपर एमआई का लोगो था.
आप तस्वीर में साफ तौर पर देख सकते हैं कि यह कोई पावर बैंक नहीं था बल्कि इसे जुगाड़ से थोड़ी देर की चार्जिंग के लिए बनाया गया था. इसमें एक बैट्री थी जिसे पावर बैंक के कवर में रखा गया था और आटे की लोई से चिपका दिया गया था. ये राज खुला तो इसे खरीदने वाला शख्स हैरान रह गया.
इसके बाद जब साथ में ही यात्रा कर रहे दूसरे शख्स ने अपना सैमसंग कंपनी का पावर बैंक खोलकर देखा तो उसके भी होश उड़ गए. सैमसंग के नाम पर बेचे गए जुगाड़ में भी बैट्री को आटे की लोई से चिपकाकर कवर के अंदर रखा हुआ था. हालांकि यह वीडियो किस ट्रेन का है यह साफ नहीं पाया है.
जिस व्यक्ति के साथ ठगी की यह वारदात हुई है वो फतेहाबाद से दिल्ली किसी निजी काम से आया था और यात्रा के दौरान ही पावर बैंक खरीदा था.
पीड़ित के मुताबिक पावर बैंक बेचने वाले ने पहले उसकी कीमत 850 रुपये बताई थी लेकिन बाद में महज 100 रुपये बेच कर फरार हो गया.
नकली सामनों को लेकर ये कोई पहला मामला नहीं है जो सामने आया है. इससे पहले भी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट के जरिए ग्राहकों से कई बार ऊंची कीमत वसूल कर उन्हें नकली सामान भेजा जा चुका है. कई बार तो मोबाइल फोन की जगह डिब्बों में साबुन या फिर ईंट का टुकड़ा रखकर भी ग्राहकों को ठगने का मामला सामने आ चुका है.
बीते जुलाई में ई-कॉमर्स कंपनी Snapdeal ने खुद खुलासा किया था कि उसके कुछ सेलर्स ग्राहकों को नकली सामान बेच रहे हैं. इस पर कार्रवाई करते हुए Snapdealने पिछले 8 महीनों के दौरान अपने प्लेटफॉर्म से 8,000 विक्रेताओं को हटा दिया है.