इस पेड़ का एक पत्ता भी सूखे तो प्रशासन चौकन्ना हो जाता है. पेड़ तक पहुंचने के लिए भोपाल-विदिशा हाईवे से पहाड़ी तक पक्की सड़क भी बनाई गई है.पेड़ के रखरखाव में हर साल लगभग 12-15 लाख रुपये खर्च होते हैं. यह और बात है कि जिस विश्वविद्यालय के नाम पर बोधि वृक्ष को रोपा गया, 7 साल बाद भी यूनिवर्सिटी को लगभग 20 लाख का किराया देकर निजी भवन में चलाया जा रहा है.