नकुड़ (Nakur) उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) जिले का एक प्रमुख कस्बा, तहसील और नगर पालिका क्षेत्र है. यह सहारनपुर से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. नकुड़ का नाम जिले के पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में लिया जाता है और इसे सहारनपुर की सबसे पुरानी तहसील माना जाता है.
नकुड़ का इतिहास पौराणिक कथाओं और मध्यकालीन घटनाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में पांडवों के भाई नकुल ने इस क्षेत्र को बसाया था. कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद यहां लोगों ने बसना शुरू किया. कस्बे में एक प्राचीन पेड़ मौजूद है, जिसके बारे में मान्यता है कि नकुल वहां रुके थे. यह पेड़ “महादेव मंदिर” परिसर में स्थित बताया जाता है.
इतिहास में नकुड़ का संबंध पठान और अफगान समुदायों से भी रहा है. माना जाता है कि शेरशाह सूरी के वंश से जुड़े पश्तून परिवार यहां आकर बसे थे. यह दौर इब्राहिम खान सूरी के समय का बताया जाता है, जो शेरशाह सूरी के दादा माने जाते हैं. अफगानिस्तान के रोह क्षेत्र से आने वाले इन परिवारों का प्रभाव नकुड़ और आसपास के इलाकों में बढ़ा. आज भी क्षेत्र में सूरी वंश से जुड़े परिवारों का जिक्र मिलता है.
मुगल काल में भी नकुड़ प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र था. ऐतिहासिक दस्तावेज ‘आइने-अकबरी’ में नकुड़ का उल्लेख सहारनपुर सरकार के अंतर्गत एक परगना के रूप में किया गया है. उस समय यहां से शाही खजाने के लिए राजस्व एकत्र किया जाता था. साथ ही यहां से पैदल सैनिक और घुड़सवार सेना उपलब्ध कराए जाने का भी उल्लेख मिलता है.
इतिहास में नकुड़ में अफगान और ब्राह्मण समुदायों की मौजूदगी दर्ज की गई है. समय के साथ यह कस्बा प्रशासनिक, सामाजिक और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा है.