मेष संक्रांति (Mesha Sankranti हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर साल अप्रैल महीने में मनाया जाता है. इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ज्योतिष में नई शुरुआत और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण इसे सौर नववर्ष की शुरुआत भी कहा जाता है.
मेष संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत खास है. इस दिन से सूर्य उत्तरायण की ओर अपनी गति को और मजबूत करता है, जिससे दिन बड़े और मौसम गर्म होने लगता है. भारत के अलग-अलग राज्यों में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. जैसे पंजाब में इसे वैशाखी, तमिलनाडु में पुथांडु और असम में बिहू और बिहार में सत्तुआनी के रूप में मनाया जाता है.
इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और भगवान सूर्य की पूजा करते हैं. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और दान-पुण्य का भी खास महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और पुण्य कई गुना फल देता है.
मेष संक्रांति का एक खास पहलू यह भी है कि यह हमें नई शुरुआत करने की प्रेरणा देता है. लोग इस दिन अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेते हैं और पुराने नकारात्मक विचारों को छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं.
कृषि के लिहाज से भी यह समय महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह फसल कटाई और नए मौसम की तैयारी का संकेत देता है. इस अवसर पर लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां बांटते हैं और अच्छे भविष्य की कामना करते हैं.