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कोहिनूर हीरा

कोहिनूर हीरा

कोहिनूर हीरा

कोहिनूर (KohiNoor) दुनिया के सबसे चर्चित और ऐतिहासिक हीरों में गिना जाता है. “कोहिनूर” शब्द फारसी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है “रोशनी का पहाड़”. यह हीरा सिर्फ अपनी चमक के लिए नहीं, बल्कि अपने लंबे इतिहास, शासकों के बदलाव और विवादों के कारण भी दुनियाभर में चर्चा में रहता है.

कोहिनूर हीरे की उत्पत्ति भारत में मानी जाती है. माना जाता है कि यह हीरा आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा क्षेत्र की खदानों से निकला था. शुरुआती समय में यह कई भारतीय राजाओं और शासकों के पास रहा. इतिहास के अनुसार, यह हीरा अलग-अलग साम्राज्यों के हाथों में जाता रहा और हर दौर में इसे शक्ति और राजसी पहचान का प्रतीक माना गया.

मुगल काल में भी कोहिनूर काफी चर्चित रहा. कहा जाता है कि यह मुगल बादशाहों के खजाने का हिस्सा था. बाद में फारस के शासक नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण के दौरान इसे अपने कब्जे में ले लिया. माना जाता है कि उसी समय इस हीरे को “कोहिनूर” नाम मिला. इसके बाद यह अफगान और सिख शासकों के पास भी पहुंचा.

माना जाता है कि यह हीरा भारत के गोलकुंडा क्षेत्र की खदानों से निकला था और सदियों तक भारतीय शासकों के पास रहा. बाद में मुगल साम्राज्य के दौरान यह शाही खजाने का हिस्सा बना.

18वीं सदी में फारसी शासक नादिर शाह भारत पर हमला करके इसे अपने साथ ले गया. इसके बाद यह अफगान शासकों और फिर सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह के पास पहुंचा. रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और अंग्रेजों ने धीरे-धीरे सिख साम्राज्य पर कब्जा कर लिया.

1849 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब को अपने नियंत्रण में लिया. इसके बाद लाहौर संधि (Treaty of Lahore) के तहत कोहिनूर हीरा ब्रिटेन को सौंप दिया गया. कई भारतीय इतिहासकार इसे जबरन लिया गया या “लूटा गया” मानते हैं. बाद में इसे ब्रिटेन भेजा गया और Queen Victoria को सौंप दिया गया. इसके बाद से कोहिनूर ब्रिटिश शाही परिवार के पास है.

वर्तमान समय में यह हीरा ब्रिटेन के शाही आभूषणों का हिस्सा माना जाता है. इसे लंदन स्थित Tower of London में प्रदर्शित किया जाता है, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं.

कोहिनूर हीरे को लेकर भारत समेत कई देशों में विवाद भी रहा है. भारत का लंबे समय से कहना है कि यह हीरा भारतीय विरासत का हिस्सा है और इसे वापस लौटाया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर कई बार राजनीतिक और कानूनी चर्चाएं भी हो चुकी हैं. हालांकि ब्रिटेन की ओर से इसे वापस करने को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.

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