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जैसलमेर किला

जैसलमेर किला

जैसलमेर किला

राजस्थान के थार मरुस्थल के बीच स्थित जैसलमेर किला (Jaisalmer Fort, Rajasthan) न केवल भारत बल्कि विश्व के सबसे अद्भुत और जीवंत किलों में गिना जाता है. इसे ‘सोनार किला’ या ‘स्वर्ण किला’ भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्य की किरणें पड़ते ही इसकी पीली बलुआ पत्थर की दीवारें सुनहरे रंग में चमक उठती हैं. इस किले का निर्माण वर्ष 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक रावल जैसल ने कराया था, जिनके नाम पर ही जैसलमेर शहर का नाम पड़ा.

जैसलमेर किला त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है और समुद्र तल से लगभग 250 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है. इसकी विशाल दीवारें, मजबूत बुर्ज और संकरी गलियां इसे एक दुर्गम और सुरक्षित किले का रूप देती हैं. ऐतिहासिक रूप से यह किला भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापार मार्ग पर स्थित होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है. पुराने समय में ऊंट कारवां यहीं से होकर गुजरते थे, जिससे यह क्षेत्र समृद्ध हुआ.

यह किला दुनिया के उन चुनिंदा किलों में शामिल है जहां आज भी लोग रहते हैं. किले के भीतर मंदिर, हवेलियां, दुकानें और आवासीय भवन मौजूद हैं. यहां स्थित जैन मंदिर, जो 12वीं से 15वीं शताब्दी के बीच बने, अपनी बारीक नक्काशी और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध हैं. इसके अलावा राजमहल, लक्ष्मीनाथ मंदिर और प्राचीन जल संरचनाएं भी दर्शनीय हैं.

वास्तुकला की दृष्टि से जैसलमेर किला राजपूत और इस्लामी शैली का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करता है. इसकी जालियों, मेहराबों और नक्काशीदार दरवाजों में उस दौर की कला और संस्कृति की झलक मिलती है. 2013 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ गया.

आज जैसलमेर किला राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इसकी ऐतिहासिक भव्यता, संस्कृति और मरुस्थलीय सौंदर्य का अनुभव करने यहाँ पहुंचते हैं.

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