एक सेठ जी ने अपने बच्चे को घर में ट्यूशन पढ़ाने के लिए एक टीचर रख लिया. टीचर रोज आता, बच्चे को पढ़ाता लेकिन बच्चा स्कूल की परीक्षा पास नहीं कर पा रहा था. सेठ जी को चिंता हुई, बच्चा प्राइवेट ट्यूशन पढ़ रहा है, फिर भी परीक्षा पास नहीं कर पा रहा, समस्या कहां है? जानें- इस कहानी से क्या संदेश देना चाहते हैं संजय सिन्हा.
Where there is no seriousness and respect of a teacher, nothing good can happen there.