ऑनलाइन शॉपिंग करते समय हम सबसे पहले जिस चीज़ को देखते हैं, वह है प्रोडक्ट के नीचे चमकते 5-स्टार रेटिंग. मोबाइल खरीदना हो, हेडफोन लेना हो या किचन का सामान. हम मान लेते हैं कि ज़्यादा स्टार मतलब बेहतर प्रोडक्ट. यही आदत अब एक नई प्रॉब्लम की जड़ बन चुकी है.
ई-कॉमर्स के बढ़ते बाजार के साथ अब एक पैरेलल दुनिया भी खड़ी हो गई है. ऐमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नकली रिव्यू यानी फेक रिव्यू की दुनिया. यहां 5-स्टार लिखे जाते हैं. बेचे जाते हैं. और कई बार बनाए जाते हैं. कस्टमर्स को लगता है कि उसने हजारों लोगों की राय देखकर फैसला लिया है. लेकिन कई बार वह राय असली नहीं होती.
यह सिर्फ कुछ शरारती लोगों की कहानी नहीं है. यह एक पूरा सिस्टम है. इसमें अलग-अलग ग्रुप्स काम करते हैं. कुछ लोग पैसे लेकर रिव्यू लिखते हैं. कुछ को मुफ्त प्रोडक्ट देकर 5-स्टार लिखवाए जाते हैं. कुछ जगह एक ही व्यक्ति कई नाम से रिव्यू डालता है. और कुछ मामलों में कम्प्यूटर से बनाए गए रिव्यू भी इस्तेमाल होते हैं.
कैसे होती है रिव्यू फार्मिंग?
मार्केट में इसे अब रिव्यू फार्म (Review Farm) कहा जाने लगा है. कुछ क्लोज्ड ग्रुप्स बने हैं जहां नए प्रोडक्ट की लिस्ट डाली जाती है. कहा जाता है कि प्रोडक्ट खरीदो. 5-स्टार लिखो. और बाद में पैसा वापस ले लो या अगला प्रोडक्ट मुफ्त पाओ.
इस तरीके से कुछ ही दिनों में किसी प्रोडक्ट पर सैकड़ों अच्छे रिव्यू दिखने लगते हैं. कस्टमर समझता है कि यह प्रोडक्ट बहुत भरोसेमंद है. लेकिन असल में यह भरोसा बनाया गया होता है.
इसका असर सिर्फ कस्टमर्स पर नहीं पड़ता. असली और ईमानदार सेलर्स भी इससे परेशान हैं. अगर कोई सेलर नकली रिव्यू नहीं खरीदता, तो उसका प्रोडक्ट लिस्ट में पीछे चला जाता है. दूसरा सेलर नकली रिव्यू से आगे निकल जाता है. धीरे-धीरे एक दबाव बनता है कि अगर बाजार में टिकना है, तो इस खेल का हिस्सा बनना पड़ेगा.
डिस्काउंट के नाम पर रिव्यू...
आपने भी कई बार ऐसे प्रोडक्ट्स ऑनलाइन खरीदे होंगे जहां आपसे उस प्रोडक्ट का रिव्यू लिखने के लिए एनकरेज किया जाता है. कई बार नेक्स्ट प्रोडक्ट पर डिस्काउंट का लालच या कैशबैक की बात की गई होती है. ऐसे में लोग ना चाह कर भी पॉजिटिव रिव्यू क देते हैं और प्रोडक्ट की स्टार रेटिंग बढ़ जाती है.
56% लोग ने माना कि ज्यादातर पॉजिटिव रिव्यू बायस्ड होते हैं..
भारत में ऑनलाइन रेटिंग और रिव्यू पर भरोसा अब खुद एक बड़ा सवाल बन चुका है. लोकल सर्कल के एक बड़े कंज्यूमर सर्वे में 56 प्रतिशत ऑनलाइन खरीदारों ने कहा कि उन्हें रेटिंग और रिव्यू पिछले 12 महीनों में पॉजिटिव ही दिखे. उसी सर्वे में 10 में से 6 लोगों ने माना कि ऑनलाइन रेटिंग और रिव्यू अक्सर पक्षपाती दिखते हैं.
10 में से 5 से ज्यादा यूजर्स ने कहा कि कई बार नेगेटिव रिव्यू पब्लिश ही नहीं होते. यानी जो तस्वीर कस्टमर को दिखती है, वह पूरी नहीं होती. यही वजह है कि 5 स्टार देखकर खरीदारी करना अब पहले जैसा सेफ नहीं रहा और कई बार 4.5 स्टार रेटेड प्रोडक्ट तक खराब निकलते हैं.
सरकार और हेल्पलाइन डेटा क्या संकेत देता है?
सरकार ने भी इस समस्या को खुलकर दर्ज किया है. उपभोक्ता मामलों के विभाग की बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर ई कॉमर्स से जुड़ी शिकायतें 2018 में 95,270 थीं, जो 2023 में बढ़कर 4,44,034 हो गईं. बात करें 2026 की तो अब ये डेटा भी तेजी से बढ़ा है.
शिकायतों की संख्या कुछ साल में कई गुना बढ़ी है. इसी संदर्भ में सरकार ने ऑनलाइन रिव्यू के लिए भारतीय मानक भी सामने रखे हैं, ताकि रिव्यू कैसे लिए जाएं, कैसे जांचे जाएं और कैसे दिखाए जाएं, इसमें पारदर्शिता लाई जा सके. यह संकेत साफ है कि नकली और भ्रामक रिव्यू अब सिर्फ सोशल मीडिया की चर्चा नहीं, बल्कि उपभोक्ता व्यवस्था की बड़ी समस्या बन चुकी है.
एजेंसियों तक पहुंच रहीं शिकायत
सरकारी एजेंसियों और उपभोक्ता संगठनों के पास भी अब लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं. कई ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने 5-स्टार देखकर महंगे प्रोडक्ट खरीदे. लेकिन इस्तेमाल के बाद पता चला कि क्वालिटी बहुत खराब है. पैसा वापस लेने की प्रक्रिया लंबी है. और रिव्यू लिखने वाले अकाउंट अचानक गायब हो जाते हैं.
एक और तरीका भी तेजी से बढ़ा है. कुछ सेलर्स अपने प्रोडक्ट पर अच्छे रिव्यू लिखवाते हैं. और साथ ही अपने कंपटीटर्स प्रोडक्ट पर बुरे रिव्यू डलवाते हैं. इससे यूजर्स को लगता है कि एक प्रोडक्ट अच्छा है और दूसरा खराब. जबकि दोनों के रिव्यू बनावटी होते हैं.
कमजोर होता कस्टमर्स का भरोसा...
इस पूरी व्यवस्था ने ग्राहक के भरोसे को कमजोर किया है. पहले माना जाता था कि ऑनलाइन रिव्यू अनबायस्ड और बैलेंस्ड होते हैं. अब कई ग्राहक मानते हैं कि हर 5-स्टार असली नहीं होता. लेकिन फिर भी खरीदारी के समय हमारे पास रिव्यू के अलावा कोई बड़ा सहारा नहीं होता. यही वजह है कि यह नकली रिव्यू का खेल लगातार फैल रहा है.
ई-कॉमर्स कंपनियां भी इस समस्या को समझ रही हैं. वे अपने स्तर पर नकली रिव्यू पहचानने की कोशिश कर रही हैं. संदिग्ध अकाउंट बंद किए जाते हैं. बार-बार एक जैसे शब्दों में लिखे गए रिव्यू हटाए जाते हैं. लेकिन जैसे-जैसे सिस्टम मजबूत होता है, वैसे-वैसे नकली रिव्यू बनाने वाले भी नए तरीके निकाल लेते हैं.
इसका असर छोटे शहरों और नए ऑनलाइन ग्राहकों पर ज्यादा पड़ रहा है. जो पहली बार ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं. वे रिव्यू देखकर जल्दी भरोसा कर लेते हैं. और वही सबसे आसान शिकार बनते हैं.
अब सवाल यह नहीं है कि नकली रिव्यू मौजूद हैं या नहीं. सवाल यह है कि हम एक ऐसी दुनिया में पहुंच चुके हैं जहां भरोसा भी एक बाजार बन गया है. और इस बाजार में कुछ लोग भरोसा बेच रहे हैं. कुछ लोग भरोसा खरीद रहे हैं. और बीच में खड़ा ग्राहक सोच रहा है कि किस पर यकीन करे.