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नीरज को स्पोर्ट्स कोटा से आर्मी ज्वाइन करवाना था मुश्किल, ऑफिसर ने बताई बैकस्टोरी

जाना जरूर स्पोर्ट्स कोटे के जरिए था, फिर भी माता-पिता को डर था. इसी वजह से कुछ आर्मी ऑफिसर्स को नीरज के घर भेजा गया था. उन ऑफिसर का काम सिर्फ इतना था कि उन्हें नीरज के माता-पिता को मनाना था.

नीरज का आर्मी में आना नहीं था आसान (Reuters) नीरज का आर्मी में आना नहीं था आसान (Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नीरज चोपड़ा का आर्मी में आना नहीं था आसान
  • नीरज के माता-पिता को मनाना थी असल चुनौती
  • रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्णा ने बताई कहानी

टोक्यो ओलंपिक में भारत को गोल्ड दिलवाने वाले नीरज चोपड़ा आर्मी की राजपूताना राइफल्स से ताल्लुक रखते हैं. स्पोर्ट्स कोटा के तहत नीरज ने आर्मी ज्वाइन की थी और बाद में वहीं पर उन्हें जैवलिन फेंकने की बेहतरीन प्रैक्टिस भी करवाई गई.लेकिन अब आर्मी के अधिकारी ने नीरज के आर्मी ज्वाइन करने की पीछे की कहानी बताई है. बताया गया कि नीरज के माता-पिता को मनाना सबसे मुश्किल काम था.

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्णा ने जानकारी दी कि नीरज चोपड़ा के माता-पिता अपने बेटे को आर्मी में भेजने को तैयार नहीं थे. जाना जरूर स्पोर्ट्स कोटे के जरिए था, लेकिन माता-पिता को डर था. इसी वजह से कुछ आर्मी ऑफिसर्स को नीरज के घर भेजा गया था. उन ऑफिसर्स का काम सिर्फ इतना था कि उन्हें नीरज के माता-पिता को मनाना था.

माता-पिता को मनाना असल चुनौती

इस बारे में अभय कृष्णा बताते हैं कि साल 2016 में राजपूताना राइफल्स के स्पोर्ट्स कोच ने पहली बार नीरज से मुलाकात की थी. तब वे पटियाला में रह रहे थे. उस समय वे भाला 80 मीटर दूर तक फेंक लेते थे. फिर मेरे आदेश के बाद कुछ स्पोर्ट्स ऑफिसर्स को नीरज के गांव भेजा गया था. उनका काम सिर्फ नीरज के माता-पिता को मनाना था. उन्हें समझाना था कि नीरज के लिए राजपूताना राइफाल्स ज्वाइन करना काफी जरूरी है. ऐसा होते ही नीरज का करियर सुरक्षित हो जाएगा. बाद में नीरज के परिवार ने हामी भर दी थी.

आर्मी और नीरज के मैडल में क्या कनेक्शन?

जानकारी दी गई जब नीरज ने स्पोर्ट्स कोटे के जरिए आर्मी ज्वाइन कर ली, तब राजपूताना राइफल्स की तरफ से ब्रिगेडियर अदिश यादव और कोच सुबेंदर सुनिल, नीरज के परिवार के पास गए थे. उन्होंने वहां पर पूरा एक दिन बिताया था और परिवार को उनके फैसले के लिए शुक्रिया अदा किया था. रिटायर्ड ऑफिसर के मुताबिक उन्हें हमेशा से पूरा भरोसा था कि नीरज एक दिन भारत के लिए मेडल लेकर आएगा. उन्हें उसकी काबिलियत पर पूरा भरोसा था.

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