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जूनियर महिला विश्‍व कप हॉकी में ठेलागाड़ी चलाने वाले की बेटी ने किया कमाल

जूनियर महिला विश्‍व कप हॉकी में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत को कांस्‍य पदक दिलाने वाली रानी रामपाल जब पांचवी क्‍लास में थी तो उसके पास न तो जूते थे और न ही हॉकी किट लेकिन रानी के पास यदि कुछ था तो केवल खेल के प्रति जुनून.

रानी रामपाल रानी रामपाल

जूनियर महिला विश्‍व कप हॉकी में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत को कांस्‍य पदक दिलाने वाली रानी रामपाल जब पांचवी क्‍लास में थी तो उसके पास न तो जूते थे और न ही हॉकी किट लेकिन रानी के पास यदि कुछ था तो केवल खेल के प्रति जुनून. इसके अलावा रानी ने जब खेलना शुरू किया था तब रूढिवादी समाज के डर से उसके परिवार ने इसका सख्त विरोध किया था लेकिन आज पूरे कस्बे को इस होनहार खिलाड़ी पर गर्व है.

जर्मनी के मोंशेंग्लाबाख में संपन्न विश्व कप के कांस्य पदक के मुकाबले में तीन गोल करके भारत को जीत दिलाने वाली रानी 'प्लेयर आफ द टूर्नामेंट' भी रही.

हरियाणा के शाहबाद की रहने वाली रानी के पिता अभी भी ठेलागाड़ी चलाते हैं और उनकी मासिक आय नौ से दस हजार रुपये है. रानी के पिता को इस  बात का मलाल है कि वे इस मैच को टीवी पर नहीं देख सके. उन्‍होंने कहा, ‘बच्चा जब अच्छा खेलता है तो देखने का मन तो करता ही है. काश, हम टीवी पर देख

पाते. हमें इंटरनेट से ही पता चला और अभी तक हम रानी को बधाई भी नहीं दे सके हैं. उसके लौटने पर ही बधाई देंगे.’

उन्होंने बताया कि रानी ने जब हॉकी खेलना शुरू किया, तब कई लोगों ने इसका विरोध किया था लेकिन अब उन सभी ने खुद बधाई दी है. उन्‍होंने आगे कहा कि रानी जिद की पक्की थी और आज वे सभी लोग हमें बधाई दे रहे हैं जो कल तक उसके खेलने की आलोचना करते थे.’

रानी के पिता का कहना है, ‘जब उसने खेलना शुरू किया था तब हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. रानी ने भी काफी कष्ट झेले हैं लेकिन जब से रानी की नौकरी रेलवे में लगी है, वह अपना खर्च उठा रही है और परिवार की भी मदद करती है.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन जितनी वह मेहनत करती है और अच्छा खेलती है, उसके अनुसार नौकरी उसके पास नहीं है. यही नहीं उसे अभी तक कोई खेल पुरस्कार भी नहीं मिला है. महिला हॉकी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिये. ये लड़कियां बड़ी तकलीफें उठाकर यहां तक पहुंची हैं.’

वहीं जूनियर महिला हॉकी विश्व कप में पहली बार पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय टीम की स्टार फारवर्ड रानी का कहना है कि मुकाबले से पहले ‘चक दे इंडिया’ में शाहरुख खान की ‘70 मिनट वाली स्पीच’ सभी के दिमाग में थी.

रानी ने कहा, ‘क्वार्टर फाइनल में स्पेन को हराने के बाद हमारा आत्मविश्वास बढा था. इंग्लैंड के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले से पहले हम सभी ने आपस में बात की और हमें शाहरुख खान की 'चक दे इंडिया' वाली स्पीच याद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये 70 मिनट जिंदगी के सबसे अहम पल हैं और

इसमें हमें अपनी पूरी ताकत झोंक देनी है.’

उन्होंने कहा, ‘टीम की कई सदस्यों का यह आखिरी जूनियर विश्व कप था और हमें भी लगा कि इन 70 मिनट में हमारी दुनिया बदल सकती है. हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है और इससे हमारा आत्मविश्वास बढा.’ हरियाणा के शाहबाद की रहने वाली रानी ने जीत का श्रेय पूरी टीम और कोचिंग स्टाफ को दिया.

इस बीच द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच बलदेव सिंह गौरवांवित हैं, क्योंकि उनके मार्गदर्शन में हॉकी के गुर सीखने वाली लड़कियों ने भारत को जूनियर महिला हाकी विश्व कप में कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

बलदेव के पसंदीदा शिष्यों में से एक रानी रामपाल टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनी और कोच ने कहा कि यह 19 वर्षीय खिलाड़ी बेजोड़ प्रतिभा की धनी है जो लंबे समय तक देश की सेवा कर सकती है.

कोच ने कहा, ‘उसमें (रानी में) किलर इंस्टिंक्ट है. वह अन्य लड़कियों से अलग है और खेल को काफी जल्दी समझ जाती है. निश्चित तौर पर वह बेजोड़ प्रतिभा की धनी है.’

भारतीय टीम में शामिल हरियाणा की छह हाकी खिलाड़ियों में से पांच शाहबाद की हैं जिसमें नवजोत, मनजीत कौर, नवनीत कौर, रानी, मोनिका और पूनम रानी शामिल हैं. राज्य से हिसार की एक खिलाड़ी भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा है. शाहबाद की लड़कियों ने इलाके के अलावा देश को भी काफी गौरवांवित किया

है.

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