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कोर्ट या सीओए नहीं चयनित संस्था को चलाना चाहिए क्रिकेट: न्यायमित्र

न्यायमित्र पी एस नरसिम्हा ने एक इंटरव्यू में कहा है कि आखिर में क्रिकेट के आयोजकों (अधिकारियों) को ही इसकी देखरेख करनी है. खेल की देखरेख करना कोर्ट का काम नहीं है.

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बीसीसीआई (फाइल फोटो- इंडियाटुडे आर्काइव)
बीसीसीआई (फाइल फोटो- इंडियाटुडे आर्काइव)

सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त न्यायमित्र पी एस नरसिम्हा का मानना है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई)   लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई संस्था गठित करने की तरफ बढ़ रहा है और कोर्ट या उससे नियुक्त निकाय के बजाय चुनी गई संस्था को खेल का संचालन करना चाहिए.

नरसिम्हा ने विभिन्न राज्य इकाईयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के बाद हाल में शीर्ष अदालत में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. एक अन्य प्रासंगिक पहलू पर पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने स्पष्ट किया कि 9 सदस्यीय शीर्ष परिषद की बात लोढ़ा कमेटी ने कभी नहीं कही थी.

नरसिम्हा ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘आखिर में क्रिकेट के आयोजकों (अधिकारियों) को ही इसकी देखरेख करनी है. खेल की देखरेख करना कोर्ट का काम नहीं है. यह वकीलों का काम नहीं है. यह कोर्ट से नियुक्त समिति का काम नहीं है कि वह खेल का संचालन करना जारी रखे.'

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उन्होंने कहा, 'यह काम क्रिकेट आयोजकों का है और ये आयोजक निर्वाचित निकाय हैं. अब सुधारों के बाद उसमें क्रिकेटरों को शामिल करना भी जरूरी है. वे क्रिकेट का संचालन करेंगे. मुझे लगता है कि चीजें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं. सुधारों की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो गई थी और अब उन्हें लागू करने का समय है.'

न्यायमित्र नरसिम्हा ने कहा कि राज्य इकाईयों के साथ उनकी कुल 135 घंटे तक चली मध्यस्थता प्रक्रिया उपयोगी रही और यह मसला अब अच्छे नतीजे के करीब है.

नरसिम्हा ने कहा, 'ऐसा लगता है कि यह एक अच्छे निष्कर्ष के करीब है इसलिए मुझे लगता है कि इस मध्यस्थता प्रक्रिया के कारण चुनाव करवाने और लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए बीसीसीआई के लिए कुछ हद तक रास्ता तैयार किया है. मेरा अनुभव शानदार रहा और राज्य इकाईयां अपने जवाबों के प्रति उत्साही थी. '

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