पूर्व फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेटर और भारतीय टीम के फ़ील्डिंग कोच रह चुके रामकृष्णन श्रीधर (R. Sridhar) की किताब आयी है. इसका नाम है कोचिंग बियॉन्ड - माय डेज़ विद द इंडियन क्रिकेट टीम. इस किताब में श्रीधर ने अपने अनुभवों को जगह दी है और कई ऐसी बातें बतायी हैं जिससे हमें टीम के बारे में और भी सूक्ष्म जानकारियां मिलती हैं. इसी क्रम में, श्रीधर ने ये बताया कि उनके मुताबिक़ एक सम्पूर्ण फ़ील्डर क्या होता है और भारतीय टीम में, या उसके बाहर, किन खिलाड़ियों में उन्हें वो खूबियां देखने को मिलीं.
आर श्रीधर ने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों में उन्हें अगर कोई कम्प्लीट-फ़ील्डर लगता है तो वो हैं सुरेश रैना. श्रीधर के मुताबिक़ रैना स्लिप के शानदार फ़ील्डर थे, आउट-फ़ील्ड में भी वो बढ़िया कैच पकड़ते थे और डायरेक्ट हिट मारने में माहिर थे. श्रीधर का कहना है कि इस सब के साथ वो मैदान पर ढेर सारी ऊर्जा लेकर भी आते थे.
टीम में जडेजा को बहुत बड़ा ओहदा मिलता है
विदेशी खिलाड़ियों के मामले में रिकी पोंटिंग की तारीफ़ करने के साथ उन्होंने एंड्रू सायमंड्स का भी नाम लिया. उन्होंने कहा कि ये दो खिलाड़ी फ़ील्डिंग के मामले में मास्टर थे. श्रीधर का मानना है कि दोनों ही फ़ील्डर स्लिप और 30 गज के घेरे के अंदर के शानदार फ़ील्डर थे. सायमंड्स की बड़ाई करते हुए श्रीधर ने लिखा है कि वो बाउंड्री लाइन पर भी गज़ब की फ़ील्डिंग करते थे और बहुत तेज़ी से मैदान कवर करते थे, इसके साथ ही उनका थ्रो भी तेज़ और सटीक होता था.
भारतीय फ़ील्डर्स में रवीन्द्र जडेजा को बहुत बड़ा ओहदा मिलता है. आर श्रीधर ने उनके बारे में बात करते हुए लिखा है कि वो बहुत कमाल के फ़ील्डर हैं लेकिन वो उन्हें स्लिप में खड़ा नहीं करना चाहेंगे. श्रीधर ने बताया कि वो जब भारतीय टीम से जुड़े थे, तब अश्विन और जडेजा स्लिप में खड़े होते थे. उस वक़्त टीम के कोच डंकन फ्लेचर थे.
श्रीधर ने डंकन से बात की और पूछा कि आख़िर जडेजा को स्लिप में क्यूं रखा जाता है. उन्होंने पूछा कि जडेजा स्लिप कैचिंग की कितनी प्रैक्टिस करते थे. उन्होंने डंकन को समझाया कि जोंटी रोड्स शानदार फील्डर थे लेकिन क्या उन्हें कभी स्लिप में खड़े देखा गया था? श्रीधर के अनुसार स्लिप में फ़ील्डिंग एक स्पेशलाइज्ड काम है जिसके लिये अलग से बहुत मेहनत करनी पड़ती है. इसी कारण श्रीधर की किताब में रवीन्द्र जडेजा को सुरेश रैना से कम नंबर मिलते हैं.

एक खिलाड़ी बताओ जिसने कभी कैच नहीं छोड़ा हो
फ़ील्डिंग के बारे में बात करते हुए श्रीधर कुछ रोचक चीज़ें बताते हैं. वो बताते हैं कि अपने पूरे करियर में उन्होंने एक बात बार-बार कही - 'मुझे एक खिलाड़ी बताओ जिसने कभी कैच नहीं छोड़ा और मैं तुम्हें भगवान दिखा दूंगा.'
एक वाकये का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि चैम्पियंस ट्रॉफ़ी 2017 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत ने ख़राब फ़ील्डिंग की. उस मैच में भारत ने तीन कैच छोड़े, फिर भी बड़े अंतर से मैच जीत लिया. उसके बाद जब साउथ अफ़्रीका से मैच हुआ तो इंडिया ने दुनिया की सबसे शानदार फ़ील्डिंग यूनिट की तरह प्रदर्शन किया. इस बात से श्रीधर ख़ुश नहीं थे. असल में, उनका कहना था कि टीम को अपने प्रदर्शन में इतना भारी अंतर नहीं लाना चाहिये.
अगर एक मैच में वो इतनी कमाल की फ़ील्डिंग कर सकती है तो दूसरे मैच में इतना ख़राब कैसे हो सकती है? इतने भारी अंतर का मतलब है कि अपने ख़राब प्रदर्शन वाले मैच में वो चीज़ों को हल्के में ले रही थी. टीम को ये नहीं देखना चाहिये कि उसका टूर्नामेंट में रहना या न रहना किसी मैच पर निर्भर कर रहा है और तभी वो अपना बेस्ट प्रदर्शन करेगी. श्रीधर ने पूरी टीम को समझाया कि उन्हें बल्ले और गेंद के अलावा फ़ील्डिंग में भी कंसिस्टेंट रहना होगा.

(आर श्रीधर की ये किताब रूपा पब्लिकेशन ने छापी है. किताब पर इसका मूल्य 395 रुपये छपा हुआ है. इसे इस लिंक पर क्लिक करके ख़रीदा जा सकता है.)