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S. Somanath बने नए ISRO चीफ, रॉकेट इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट

विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के निदेशक और इसरो के प्रमुख वैज्ञानिक एस. सोमनाथ (S. Somanath) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नए चीफ बनाए गए हैं. तिरुवनंतपुरम स्थित VSSC के डायरेक्टर एस. सोमनाथ देश के बेहतरीन रॉकेट टेक्नोलॉजिस्ट और एयरोस्पेस इंजीनियर हैं.

S. Somanath बने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के नए प्रमुख. (फोटोः ISRO) S. Somanath बने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के नए प्रमुख. (फोटोः ISRO)

विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के निदेशक और इसरो के प्रमुख वैज्ञानिक एस. सोमनाथ (S. Somanath) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नए चीफ बनाए गए हैं. तिरुवनंतपुरम स्थित VSSC के डायरेक्टर एस. सोमनाथ देश के बेहतरीन रॉकेट टेक्नोलॉजिस्ट और एयरोस्पेस इंजीनियर हैं. 

VSSC से पहले एस. सोमनाथ तिरुवनंतपुरम स्थित लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (LPSC) के डायरेक्टर भी रहे हैं. इन्होंने इसरो के रॉकेट्स के विकास में काफी ज्यादा योगदान दिया है. सोमनाथ लॉन्च व्हीकल की डिजाइनिंग के मास्टर हैं. वो लॉन्च व्हीकल सिस्टम इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल डिजाइन, स्ट्रक्चरल डायनेमिक्स और पाइरोटेक्नीक्स के एक्सपर्ट हैं. 

ये है वो सरकारी आदेश जिसमें S. Somanath को नया इसरो चीफ बनाने का आदेश दिया गया है.
ये है वो सरकारी आदेश जिसमें S. Somanath को नया इसरो चीफ बनाने का आदेश दिया गया है.

इसरो चीफ बनने से पहले वो GSAT-MK11 (F09) को अपग्रेड करने में लगे थे. ताकि भारी संचार सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में लॉन्च किया जा सके. उसके अलावा एस.सोमनाथ GSAT-6A और PSLV-C41 को भी बेहतर बनाने में लगे थे ताकि रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स को सही तरीके से लॉन्च किया जा सके. 

एस. सोमनाथ ने एर्नाकुलम से महाराजा कॉलेज से प्री-डिग्री प्रोग्राम पूरा किया है. इसके बाद केरल यूनिवर्सिटी के क्विलॉन स्थित टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की. फिर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (IISc) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर की डिग्री हासिल की. उन्हें रॉकेट डायनेमिक्स और कंट्रोल पर विशेषज्ञता हासिल है. 

ग्रैजुएएशन करने के बाद ही साल 1985 में एस. सोमनाथ ने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर ज्वाइन किया. शुरुआती दौर में वो PSLV प्रोजेक्ट के साथ काम करते रहे. उसके बाद उन्हें साल 2010 में GSLV Mk-3 रॉकेट का प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया गया. साल 2015 में वो LPSC के प्रमुख बने. साल 2018 में वो VSSC के निदेशक बने. 

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