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शनिदोष को शांत करने के लिए धारण करें रुद्राक्ष

ग्रहों की शांति के लिए कई पूजा-पाठ किए जाते हैं. अगर आप शनिदोष से पीडि़त हैं तो शि‍व के प्रिय रुद्राक्ष को धारण करने से आपको लाभ मिल सकता है. 

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शिव को बहुत को बहुत प्रिय है रुद्राक्ष
शिव को बहुत को बहुत प्रिय है रुद्राक्ष

जी हां, रुद्राक्ष यानी वो वस्तु जिसे रुद्र का अक्ष यानी आंसू कहा जाता है. माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओँ से हुई है और इसको प्राचीन काल से ही आभूषण की तरह पहना जाता रहा है.

रुद्राक्ष इस धरती पर अकेली ऐसी वस्तु है जिसको मंत्र जाप और ग्रहों को नियंत्रित करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार रुद्राक्ष की विशेषताओं और महिमा का बखान शास्त्रों में भी खूब किया गया है.

रुद्राक्ष की महिमा
प्राचीन काल के इस आभूषण को मंत्र जाप और ग्रहों को नियंत्रित करने के लिए उत्तम माना जाता है. रुद्राक्ष के प्रयोग से हम शनि की पीड़ा को भी दूर कर सकते हैं. रुद्राक्ष को धारण करने के लिए कुछ नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है.

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शनि का महत्व और असर
रुद्राक्ष की ताकत इतनी ज्यादा है कि उसके कुछ खास नियम धर्म होते हैं और अगर उन नियम धर्मों का पाल नहीं किया जाता तो बुरे फल भी मिलने लगते हैं. लेकिन ज्योतिषियों की मानें तो रुद्राक्ष का सही ढंग से प्रयोग किया जाए तो शनि की टेढ़ी नजर से होने वाले कष्टों से भी आप मुक्ति पा सकते हैं. चलिए सबसे पहले आपको बताते हैं कि शनि का क्या महत्व है और उसका हमारे जीवन पर क्या असर पड़ता है...
- शनि हमारे जीवन में हर तरह के कर्म और उसके फल से संबंधित है.
- शनि दंड का अधिपति है इसलिए हमारे दुष्कर्मों की सजा भी देता है.
- शनि की कृपा से ही रोजगार मिलता भी है और चलता भी है.
- अगर शनि पीड़ादायक हो तो जीवन में संघर्ष की मात्रा बढ़ जाती है.
- व्यक्ति को रोजगार से लेकर स्वास्थ्य तक हर जगह मुश्किलें होती हैं.
- शनि के अनुकूल होने पर

रुद्राक्ष धारण करने के नियम
ज्योतिष के जानकारों की मानें तो जीवन में आने वाले संघर्षो को दूर करने के लिए रुद्राक्ष के इस्तेमाल करने के कुछ खास उपाय हैं. इन उपायों को अगर कड़े नियमों के साथ किया जाए तो शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है. आइए जानें, रुद्राक्ष धारण करने के नियमों के बारे में...
- रुद्राक्ष को कलाई, गला और हृदय पर धारण किया जा सकता है.
- इसे गले में धारण करना सर्वोत्तम होगा इसे कलाई में 12, गले में 36 और ह्रदय पर 108 दानों को धारण करना चाहिए.
- हृदय तक लाला धागे में एक दाना रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं.
- सावन में, सोमवार को और शिवरात्री के दिन रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम होता है. रुद्राक्ष धारण करने के पहले उसे शिव जी को समर्पित करना चाहिए.
- उसी माला या रुद्राक्ष पर मंत्र जाप करना चाहिए.
- जो भी रुद्राक्ष धारण कर रहा है उसे सात्विक रहना चाहिए और आचरण शुद्ध न रखने पर रुद्राक्ष लाभ नहीं देता.

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शनि के लिए रुद्राक्ष का प्रयोग
पर जल्दी राहत मिलती है. अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर शनि की बाधाओं को दूर करने लिए किस तरह से रुद्राक्ष का प्रयोग करना चाहिए. आइए जानें हर समस्या का कैसे होगा समाधान...
रोजगार की समस्या में
- इसके लिए दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.
- इसे शनिवार को लाल धागे में गले में धारण करें.
- एक साथ 3 दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना फायदेमंद होगा.

स्वास्थ्य की समस्या हो तो
- इसके लिए शनिवार को गले में 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें.
- सिर्फ आठ मुखी रुद्राक्ष पहनें या फिर एक साथ 54 आठ मुखी रुद्राक्ष पहनें.
शनि की साढ़ेसाती या ढैया हो तो
शनि की साढ़े साती या ढैय्या में मिलने वाले कष्टों को दूर करने लिए किस रुद्राक्ष का कैसे इस्तेमाल करना है इसे भी जान लें...
- इसके लिए गले में रुद्राक्ष की माला धारण करें ये माला अगर पांच मुखी रुद्राक्ष की हो तो उत्तम होगा.
- धारण करने के पहले इसी माला से शनि और शिव जी का मंत्र जाप करें.

कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए
- एक मुखी और ग्यारह मुखी रुद्राक्ष एक साथ धारण करें.
- इसमें 1, एक मुखी और 2, ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रखें.
- इसको एक साथ लाल धागे में धारण करें.

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ज्योतिषी कहते हैं कि रुद्राक्ष के इस उपाय से कुंडली में मौजूद शनि के अशुभ योग भी खत्म हो जाते हैं. रुद्राक्ष में वो शक्ति है जो अपने धारक को हर तरह की परेशानी से लड़ने की क्षमता देता है और उनको दूर करता है. उम्मीद है कि आपको भी रुद्राक्ष के इन प्रयोगों को खास फायदा होगा.

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