हिन्दू पंचांगों में बारह मास होते हैं. यह सूर्य की संक्रांति और चन्द्रमा पर आधारित होते हैं. हर वर्ष सूर्य और चन्द्र मास में लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. तीन वर्ष में यह अंतर लगभग एक माह का हो जाता है इसलिए हर तीसरे वर्ष अधिक मास आ जाता है. इसको लोकाचार में मलमास भी कहा जाता है. इस बार आषाढ़ में अधिक मास रहेगा. यह 16 मई से 13 जून तक रहेगा.
अधिक मास का महत्व क्या है?
- अधिक मास को पहले बहुत अशुभ माना जाता था
- बाद में श्रीहरि ने इस मास को अपना नाम दे दिया
- तबसे अधिक मास का नाम "पुरुषोत्तम मास" हो गया
- इस मास में भगवान विष्णु के सारे गुण पाये जाते हैं
- इसलिए इस मास में धर्म कार्यों के उत्तम परिणाम मिलते हैं
अधिक मास में कौन-कौन से कार्य न करें?
- यह महीना आध्यात्मिक महीना है
- इस महीने भौतिक जीवन से संबंधित कार्य करने की मनाही है
- विवाह, कर्णवेध, चूड़ाकरण आदि मांगलिक कार्य वर्जित हैं
- गृह निर्माण और गृह प्रवेश भी वर्जित है
- परन्तु जो कार्य पूर्व निश्चित हैं, वे कार्य किये जा सकते हैं
अधिक मास में कौन कौन से कार्य करना लाभदायक है?
- नियमित रूप से श्री हरि, अपने गुरु या ईष्ट की आराधना करें
- जहाँ तक सम्भव हो आहार, विचार और व्यवहार सात्विक रखें
- पूरे माह में श्रीमदभागवत या भगवदगीता का पाठ करें
- निर्धनों की सहायता करें, अन्न, वस्त्र और जल का दान करें
- इस माह में पूर्वजों और पितरों के लिए किये गए कार्य भी लाभदायी होते हैं
- लौकिक कामनाओं के लिए इस महीने किये गए प्रयोग अवश्य सफल होते हैं
कैसे अधिक मास में ग्रहों को अनुकूल बनायें और ईश्वर की कृपा प्राप्त करें?
- पूरे महीने, प्रातः और सायंकाल भगवान कृष्ण की उपासना करें
- संध्याकाळ को उनके समक्ष दीपक जरूर जलाएं
- नियमित रूप से भगवान की कथा का श्रवण करें
- निर्धनों को जल और ऋतुफल का दान करें
- माह के अंत में तीस की संख्या में मिठाई का दान करें
साभार...............
शैलेन्द्र पाण्डेय - ज्योतिषी