प्रेगनेंट महिलाओं को नग्न आंखों से ग्रहण को नहीं देखना चाहिए. संभव हो तो उसे घर पर रुकना चाहिए और ग्रहण के दौरान घर के खुले हिस्से में नहीं घूमना चाहिए.
कई लोगों का मानना है कि सूर्य ग्रहण के दौरान बाहर जाने की मनाही केवल एक धार्मिक अंधविश्वास है लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है. प्रेगनेंट महिला की बेली की स्किन भ्रूण की रक्षा के लिए पतली सुरक्षात्मक खोल की तरह होती है इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान हानिकारक सूर्य विकिरण प्रेगनेंट महिला की बेली की त्वचा को आसानी से भेद सकते हैं. इसलिए विनाशकारी अल्ट्रावायलट किरणों के संपर्क में भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है.
संभव हो तो ग्रहण के पूर्व और ग्रहण के बाद स्नान कर लें. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से ग्रहण के बुरे प्रभाव खत्म हो जाते हैं.
कई धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक, प्रेगनेंट महिलाओं को दूर्वा घास लेकर बैठना चाहिए और सनातन गोपाल मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए.
चाकू और धारदार हथियारों का इस्तेमाल नहीं करें. ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के दौरान सब्जियां और फल काटना बच्चे के लिए अशुभ साबित होता है.
सूर्य ग्रहण के समय नियमित कामकाज जैसे खाना-पीना, स्नान, दांत मांजना, खाना पकाना, कपड़े धोने जैसे काम ग्रहण खत्म होने के बाद करने चाहिए. सूर्य ग्रहण के बाद ही बर्तन आदि मांजे.
ग्रहण के दौरान परेशान बिल्कुल ना हों-
सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है हालांकि ज्योतिष मान्यताओं में ग्रहण के दौरान कई कार्य वर्जित बताए गए हैं और सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है लेकिन यह केवल आपकी और आपके होने वाले बच्चे की सुरक्षा के लिए ही है. इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान प्रेगनेंसी को लेकर बिल्कुल भी चिंतित ना हों. जितना हो सकें, खुश रहें.