केरल में पथानामथिट्टा जिले के पश्चिमी घाट की पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर को दुनिया के बड़े तीर्थ स्थलों में शुमार किया जाता है. इस मंदिर का असली नाम सबरिमलय है. ये मंदिर 18 पहाड़ियों के बीच स्थित है. इस मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगे बैन को हटाने के बाद इस मंदिर के द्वार आज 5 दिन की मासिक पूजा के लिए खुलने वाले हैं, जिसमें महिला संगठनों ने प्रवेश की योजना बनाई है.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी यहां महिलाओं को प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की जा रही है, जिससे तनाव भी बढ़ रहा हैं. आइए जानें, आखिर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई....
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद कई वर्षों पहले एक कन्नड़ अभिनेत्री जयमाला के खुलासे से शुरू हुआ था. 2006 में सबरीमाला के प्रमुख ज्योतिषी परप्पनगडी उन्नीकृष्णन ने चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि अयप्पा अपनी ताकत खो रहे हैं. उसके बाद उन्नीकृष्णन ने यह भी दावा किया था कि भगवान इसलिए नाराज हैं क्योंकि मंदिर में किसी युवा महिला ने प्रवेश किया है.
कन्नड़ अभिनेत्री जयमाला के कन्फेशन के मुताबिक, 1987 में अपने पति के साथ वह मंदिर में दर्शन करने गई थी. मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ के धक्कों की वजह से वह गर्भगृह में पहुंच गई और भगवान अयप्पा के चरणों में गिर गईं. जहां पुजारी ने उन्हें फूल भी दिए थे. उनके इस दावे के बाद पूरे केरल में बवाल मच गया था.
14 दिसंबर 2010 को पथानामथिट्टा जिले के रन्नी में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में केरल पुलिस ने जयमाला के खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल की. पुलिस ने जयमाला पर जानबूझकर तीर्थस्थल के नियमों का उल्लंघन करते हुए लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था.
ठीक इसी समय कन्नड़ अभिनेता प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने भगवान अयप्पा की मूर्ति को छुआ है और वे खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं.
हालांकि, बाद में केरल हाईकोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट को खारिज कर दिया और जयमाला कानूनी लड़ाई जीत गईं.
उनके दावे की टाइमिंग को लेकर काफी सवाल भी उठे थे. 27 साल की एक्ट्रेस के
कन्फेशन का मकसद क्या था? उन्हें पुजारी से फूल कैसे मिले? वह मंदिर में
बिना किसी की नजर में आए कैसे घुस गईं? क्या यह उन्नीकृष्णन का मंदिर के
दूसरे पुजारियों के खिलाफ किसी साजिश का हिस्सा था?
हालांकि, जयमाला ने किसी भी साजिश का हिस्सा होने की बात से इनकार कर दिया था. जयमाला ने कहा था कि शायद मुझे इसलिए नहीं रोका गया हो क्योंकि मैं मशहूर ऐक्ट्रेस थी और मुझे इस बात का भी पता नहीं था कि वहां महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है.
मंदिर के नियम के खिलाफ उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर में 10 से 50 वर्ष की लड़कियों के प्रवेश पर ही प्रतिबंध है.
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश न करने देने का ये था कारण-
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का मुख्य कारण ये बताया जाता रहा है कि मासिक धर्म के समय वे शुद्धता बनाए नहीं रख सकती हैं. करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में ये मान्यता पिछले काफी समय से चल रही थी कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश ना करने दिया जाए.
50 वर्ष से अधिक उम्र की महिला को मंदिर में प्रवेश करने के लिए अपने साथ आयु प्रमाणपत्र साथ ले जाना होता था, उम्र की जांच होने के बाद ही उन्हें मंदिर में प्रवेश करने दिया जाता था.
बता दें, सबरीमाला मंदिर अय्यपन देव को समर्पित है. कहा जाता है कि अय्यपन पूजा के लिए भगवान परशुराम ने सबरीमाला मंदिर में मूर्ति की स्थापना की थी.
मान्यता है कि भगवान अय्यपन ब्रह्मचारी थे, जिस वजह से मंदिर में केवल उन्हीं बच्चियों और महिलाओं को प्रवेश करने दिया जाता है, जिन्हें मासिक धर्म ना होता हो.
मान्यता है कि जो श्रद्धालु तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर और व्रत रख कर सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.