लट्ठमार होली खेलने की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा के समय से हुई थी. हिंदू मान्यता के अनुसार कृष्ण अपने मित्रों के साथ होली खेलने बरसाना जाया करते थे, लेकिन राधा और उनकी सखियों के साथ ठिठोली करने की वजह से राधा उनसे नाराज होकर अपनी सभी सखियों के साथ मिलकर ग्वालों पर डंडे बरसाया करती थीं. उनके लाठियों के वार से बचने के लिए कृष्ण और उनके दोस्त ढालों और लाठी का प्रयोग करते थे. वक्त के साथ होली खेलने का ये तरीका धीरे-धीरे परंपरा बन गया. इस होली को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग बरसाना आते हैं.
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