शास्त्र और पुराण हमें जीवन जीने का सही तरीका बताते हैं. इंसान को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इनमें खान-पान से लेकर वस्त्र धारण करने तक के नियम भी शामिल हैं. विष्णु पुराण में भी कुछ ऐसे ही नियमों का जिक्र किया गया है. हमारी दिनचर्या से हमारी ऊर्जा पर भी असर पड़ता है, ऐसे में शास्त्रों में उल्लिखित कुछ नियमों को जानना जरूरी है...
विष्णु पुराण में बताया गया है कि मनुष्य को 3 समय पर निर्वस्त्र नहीं रहना चाहिए.
विष्णु पुराण के अनुसार, सोते समय मनुष्य को निर्वस्त्र नहीं रहना चाहिए. ऐसा करने से रात्रि के देवता चन्द्रमा का अपमान होता है. ऐसी भी मान्यता है कि रात के समय पितृगण अपने परिजनों को देखने आते-रहते हैं. अपने परिजनों को निर्वस्त्र देखकर उन्हें कष्ट होता है.
स्नान-
विष्णु पुराण के बारहवें अध्याय में कहा गया है कि
स्नान के समय मनुष्य को निर्वस्त्र नहीं होना चाहिए. इसका सम्बन्ध
श्रीकृष्ण के बाल कांड से जोड़कर देखा जाता है, जब श्रीकृष्ण गोपियों के
वस्त्र लेकर भाग जाते थे. गोपियां निर्वस्त्र होकर नदी में स्नान करती थीं.
भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं में यही संदेश दिया था कि मनुष्य को स्नान
के समय निर्वस्त्र नहीं रहना चाहिए क्योंकि इससे जल देवता का अपमान होता
है.
पुराण के अनुसार, मनुष्य को संभोग करते समय भी निर्वस्त्र नहीं होना चाहिए.
विष्णु पुराण के अनुसार, मनुष्य को आचमन करते वक्त भी निर्वस्त्र नहीं रहना चाहिए.
पूजा करते समय बिना सिले हुए दो वस्त्र धारण करने का विधान है क्योंकि सिलाई सांसारिक मोह-माया के बंधन का प्रतीक होती है. भगवान की भक्ति बंधन के एहसास से मुक्त होकर करनी चाहिए.