हिन्दू धर्म में दान का खास महत्व है. खासतौर से पितृपक्ष में पितरों को खुश करने के लिए अपनी श्रद्धा से दान करते हैं. इससे पितरों का आर्शीवाद मिलता है. इस दौरान किए गए दान न केवल पितरों को खुश करता है, बल्कि इससे कालसर्प दोष एवं पितृदोष भी खत्म होता है. आयु बढ़ती है और धन, यश, सफलता, सुख शांति आदि प्राप्त होता है.
ज्योतिषी शैलेंद्र पांडेय के अनुसार पितृपक्ष के दौरान इन 10 चीजों को दान करने से पितर खुश होते हैं और आर्शीवाद देते हैं...
1. गौदान: इस दान को करने से व्यक्ति को निश्चित रूप से मुक्ति की प्राप्ति होती है. व्यक्ति इस दान को प्रत्यक्ष भी कर सकता है और संकल्प से भी.
2. भूमि दान: भूमि या इसके अभाव में केवल मिट्टी का दान करने से यह दान पूर्ण हो जाता है. इससे आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है.
3. तिलदान: काले तिलों का दान करने से व्यक्ति को ग्रह और नक्षत्रों की बाधा से मुक्ति मिलती है.
4. स्वर्णदान: स्वर्ण दान करने से व्यक्ति को कर्ज और रोगों से मुक्ति मिलती है. स्वर्ण के अभाव में केवल दक्षिणा भी दी जा सकती है.
5. घृतदान: गाय का घी पात्र सहित दान करना चाहिए, इससे पारिवारिक जीवन बेहतर हो जाता है.
6. वस्त्र दान: इसमें वस्त्र और उपवस्त्र दोनों अलग-अलग दान किए जाते हैं. वस्त्र नवीन हों और फटे पुराने न हों.
7. धान्यदान: इसमें अलग-अलग या कोई एक धान्य दान किया जाता है. इससे वंश वृद्धि संभव हो जाती है.
8. गुड़दान: गुड़ का दान करने से पितरों को विशेष संतुष्टि प्राप्त होती है.
9. रजत दान: चांदी का दान करना परिवार और वंश को मजबूत करता है. चांदी के अभाव में सफेद धातु की कोई वस्तु दान की जा सकती है.
10. लवण दान: नमक का दान किए बिना कभी भी दान सम्पूर्ण नहीं होता. नमक का दान करने से प्रेत और आत्माओं की बाधा से मुक्ति मिलती है.