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Vinayak Chaturthi 2022: विनायक चतुर्थी पर आज बन रहे विशिष्ट योग, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त

Vinayak Chaturthi 2022: आज ज्येष्ठ मास की विनायक चतुर्थी है. इस दिन व्रत करने से गणेश जी की असीम कृपा प्राप्त होती है और कार्य में सफलता, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है. गणपति की कृपा से व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है और राह में आने वाले सारे विघ्न दूर हो जाते हैं.

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आज मनाई जा रही है विनायक चतुर्थी आज मनाई जा रही है विनायक चतुर्थी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • विनायक चतुर्थी आज
  • विशिष्ट योग से होगा लाभ
  • जानें पूजन का शुभ मुहूर्त

Vinayak Chaturthi: आज विनायक चतुर्थी का व्रत है. आज के दिन गणपति बप्पा की विधि पूर्वक पूजा करने का विधान है. गणपति की कृपा से सारे दुख दूर होते हैं. विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की उपासना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है. ज्येष्ठ मा​  के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी इस बार कुछ विशेष संयोगों के साथ आई है. इस शुभ घड़ी में गणपति की पूजा करने का फल चार गुना ज्यादा हो सकता है. ज्योतिषियों का कहना है कि आज विनायक चतुर्थी पर कुछ खास योग बन रहे हैं. इसकी वजह से आज के दिन का महत्व और बढ़ गया है.

विनायक चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त- विनायक चतुर्थी का व्रत रखने से गणपति की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन से सारे विघ्न कट जाते हैं. विनायक चतुर्थी के पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक है. 

विनायक चतुर्थी पर बन रहे विशिष्ट योग- विनायक चतुर्थी पर चार विशिष्ट योग बने हैं. सुबह 05:23 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग लग चुका है जो शाम 07:05 बजे तक रहेगा. सुबह 05:23 बजे से शाम 07:05 बजे तक रवि योग रहेगा. वृद्धि योग की शुरुआत भी आज सुबह से हो चुकी है जो 04 जून को दपहर 03:34 तक रहेगा. वहीं सुबह शुरू हुआ ध्रुव योग भी 04 जून को सुबह 03:50 मिनट तक रहेगा.

विनायक चतुर्थी पर मिलेगा योगों का लाभ- विनायक चतुर्थी पर बन रहे ये चार विशिष्ट योग सुख-समृद्धि बढ़ाने वाले हैं. इन योगों के बीच भगवान गणेश और चंद्रमा का पूजन भी बहुत फलदायी रहने वाला है. इस दौरान गणपति के भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और उन्हें सिद्धि, बुद्धि और समृद्धि का वरदान प्राप्त होगा.

भगवान गणेश की पूजन विधि- सुबह के समय जल्दी उठकर स्नान आदि करके लाल रंग के वस्त्र धारण करें और सूर्य भगवान को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें. उसके बाद भगवान गणेश के मंदिर में एक जटा वाला नारियल और मोदक प्रसाद के रूप में लेकर जाएं. उन्हें गुलाब के फूल और दूर्वा अर्पण करें तथा ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 27 बार जाप करें और धूप दीप अर्पण करें. दोपहर पूजन के समय अपने घर मे अपनी सामर्थ्य के अनुसार पीतल, तांबा, मिट्टी अथवा सोने या चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित करें. संकल्प के बाद पूजन कर श्री गणेश की आरती करें और मोदक बच्चों के बाट दें.

 


 

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