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Sawan Shaniwar 2023: सावन का आखिरी शनिवार आज, राशिनुसार ये उपाय करने से होगा भाग्योदय

Sawan Shaniwar 2023: कहते हैं कि सावन में शन की उपासना से सालभर के फल की प्राप्ति हो जाती है. इस बार सावन का अंतिम शनिवार 26 अगस्त को है और इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है.

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Sawan Shaniwar 2023: सावन का आखिरी शनिवार आज, राशिनुसार ये उपाय करने से होगा भाग्योदय
Sawan Shaniwar 2023: सावन का आखिरी शनिवार आज, राशिनुसार ये उपाय करने से होगा भाग्योदय

Sawan Shaniwar 2023: सावन का प्रत्येक शनिवार धन प्राप्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसमें शनि की कृपा बहुत सरलता से मिल सकती है. कहते हैं कि सावन में शनि की उपासना से सालभर के फल की प्राप्ति हो जाती है. इस बार सावन का अंतिम शनिवार 26 अगस्त को है और इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है. इसी वजह से यह श्रावण शनिवार विशेष फलदायी हो गया है. इस दिन शनि संबंधी हर समस्या का निवारण हो सकता है.

वरदान का शनिवार
सावन के अंतिम शनिवार को विशेष उपाय से संतान संबंधी हर समस्या दूर हो सकती है. आर्थिक समस्याएं और कर्ज से छुटकारा मिल सकता है. स्वास्थ्य और आयु की रक्षा का वरदान मिल सकता है. दुर्घटनाओं से रक्षा हो सकती है. यहां तक कि साढ़ेसाती और ढैय्या से भी मुक्ति मिल सकती है.

सावन के अंतिम शनिवार राशिनुसार उपाय
मेष- शिव जी को बेलपत्र चढ़ाएं और शनि मंत्र का जप करें.
वृष- पीपल के नीचे दीपक जलाएं. नमः शिवाय का जप करें.
मिथुन- शनि मंत्र का जप करें. पीपल का पौधा लगाएं.
कर्क- पीपल के नीचे दीपक जलाएं. भोजन का दान करें.
सिंह- शिव मन्त्र का जप करें. सिक्कों का दान करें.
कन्या- शिव जी को बेलपत्र अर्पित करें. दीपक जलाएं.
तुला- काली दाल का दान करें. शिव मंत्र का जप करें.
वृश्चिक- शनि मंत्र और शिव मंत्र का जप करें.
धनु- खाने पीने की चीजों का दान करें. शनि मंत्र का जप करें.
मकर- शिव जी को जल अर्पित करें और दीपक जलाएं.
कुम्भ- शिव मंत्र का जप करें. काली वस्तुओं का दान करें.
मीन- शनि मंत्र का जप करें. पीपल का पौधा लगाएं.

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शनि देव के मंत्र

1. शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

2. सामान्य मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः।

3. शनि महामंत्र
ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥

4. शनि का पौराणिक मंत्र
ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

5. शनि का वैदिक मंत्र
ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।

 

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