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धौलपुर: 28 जगह बने 'संविधान घर', चंद्रज्योति अभियान बना जन-जागरण की मिसाल

राजस्थान के धौलपुर जिले में चंद्रज्योति अभियान के जरिये संविधान की चेतना गांव-गांव तक पहुंच रही है. जिला परिषद सीईओ अव्हाद निवृत्ति सोमनाथ के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान आज 350 स्कूलों, 28 ग्राम पंचायतों और हजारों बच्चों को संविधान की आत्मा से जोड़ रहा है. संविधान अब दीवारों से उतरकर व्यवहार का हिस्सा बन चुका है.

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धौलपुर में संवैधानिक चेतना का जागरण
धौलपुर में संवैधानिक चेतना का जागरण

धौलपुर जिले में एक अनोखा अभियान चलाया जा रहा है, जिसका नाम है चंद्रज्योति अभियान. यह अभियान संविधान की जानकारी और चेतना फैलाने के लिए शुरू किया गया है. इस पहल की शुरुआत जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अव्हाद निवृत्ति सोमनाथ ने जनवरी 2025 में की थी.

इस अभियान का उद्देश्य था कि बच्चों को संविधान सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि जीवन में भी महसूस हो. इसी सोच के साथ स्कूलों में 'बाल संसद’, निबंध लेखन, वाद-विवाद, और भूमिकानुभव जैसी गतिविधियां शुरू की गईं. इससे छात्र न केवल मौलिक अधिकार और कर्तव्यों को समझ रहे हैं, बल्कि नेतृत्व क्षमता भी विकसित कर रहे हैं.

स्कूली बच्चों ने चलाया चंद्रज्योति अभियान

धौलपुर जिले में अब तक यह अभियान 350 से ज्यादा स्कूलों और 28 पंचायतों में पहुंच चुका है. 50 हजार से अधिक बच्चे इससे प्रभावित हो चुके हैं. स्कूलों की दीवारों पर “संविधान की दीवार” नाम से चित्र और उद्धरण बनाए गए हैं, जो राहगीरों को भी संविधान के प्रति जागरूक करते हैं.

जिला परिषद का परिसर भी इस आंदोलन का उदाहरण बन गया है. यहां हर दीवार संविधान का संदेश देती है. प्लास्टिक-मुक्त परिसर में अब कांच की बोतलें और जूट के थैले इस्तेमाल किए जाते हैं.

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संविधान जीवन में भी महसूस हो

एक और नई पहल के तहत जिले की 28 उपेक्षित सरकारी इमारतों को “संविधान घर” में बदला जा रहा है, जहां ग्रामीण नागरिक संविधान को पढ़ और समझ रहे हैं. डिजिटल संसाधनों से युक्त ये केंद्र युवाओं को सिविल सेवा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी मदद कर रहे हैं. यह आंदोलन दिखाता है कि लोकतंत्र की असली ताकत स्कूलों और गांवों में बसे बच्चों में है.

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