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Lumpy Skin Disease: रेगिस्तान में गायों को दफन करने के लिए जमीन भी पड़ रही कम

Lumpy Skin Disease: राजस्थान के अकेले बाड़मेर जिले में ही रोजाना 20- 25 गोवंश को दफनाने के लिए लाया जा रहा है, लेकिन जगह कम पड़ने की वजह से खुले में मृत गायों को डाला जा रहा है. इससे आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है और इससे भयंकर दुर्गंध आ रही है.

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लंपी स्कीन बीमारी से गायों की मौत. (फाइल फोटो) लंपी स्कीन बीमारी से गायों की मौत. (फाइल फोटो)

राजस्थान के बाड़मेर जिले में गोवंश में लंपी स्कीन डिजीज ( Lumpy Skin Disease) पूरी तरीके से जानलेवा हो गई है. हालात यह है कि सरकारी आंकड़ों में पिछले 24 घंटों में 500 से ज्यादा गोवंश की मौत हुई है. जबकि धरातल पर यह आंकड़ा  3 गुना से ज्यादा है. आलम यह है कि गोवंश को दफन करने के लिए शहर से लेकर गांव तक जमीन कम पड़ने लगी है. इस बात की यह तस्वीर ही गवाह है...

लंपी स्कीन डिजीज एक संक्रमित रोग है जो गोवंश में महामारी की तरह फैल रहा है. इस बात की गवाही जगह-जगह से आ रहीं तस्वीरें दे रही हैं. बाड़मेर जिला मुख्यालय से 2 किलोमीटर दूर एक डंपिंग यार्ड की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यहां आमतौर पर दो या तीन मृत गौवंश के शव आते थे, लेकिन पिछले 15 दिनों से रोजाना 20- 25 या कभी-कभी तो 40 से 50 मृत गौवंश को लाया जा रहा है. यह तो केवल शहर और उसके आसपास के इलाकों का आंकड़ा है, इसमें भी दफनाने के लिए जगह नहीं बची है. इसीलिए ठेकेदार ने जमीन पर ही चारों तरफ सैकड़ों की तादाद में मृत गौवंश को डाल रखा है. जब ठेकेदार से पूछा गया कि दफन क्यों नहीं किया जा रहा है? तो उसका कहना था कि अब इतनी जगह ही नहीं बची.

जब Aajtak की टीम डंपिंग यार्ड पर पहुंची तो आसपास के रहने वाले लोगों ने बताया कि पिछले 15 दिन से उनका जीना मुश्किल हो गया है. मृत गौवंश को दफनाया न जाकर खुले में डाला जा रहा है, इससे भयंकर दुर्गंध आ रही है और जीना दूभर हो गया है.

Aajtak की टीम इसके बाद गोपाल गौशाला पहुंची. गौशाला के संचालक ने बताया कि करीब ढाई सौ गौवंश इस बीमारी की चपेट में आए थे. इसमें 150 गौवंश की मौत हो चुकी है. 100 के करीब अभी भी ग्रसित हैं, जिसका इलाज किया जा रहा है.

बाड़मेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु ने बताया कि सरकार और प्रशासन पूरी तरीके से बीमारी को काबू पाने के लिए लगातार काम कर रहा है. जिले में 25 से ज्यादा टीमें प्रभावित इलाकों में सर्वे कर ग्रसित गौवंश का इलाज कर रही हैं. 

अभी तक जिले में 80 हजार गौवंश का सर्वे हुआ है, जिसमें 16 हजार गौवंश इस रोग से ग्रसित पाया गया है. वहीं, पिछले 24 घंटों में करीब 500 गौवंश की मौत हो चुकी है. अब आप अंदाजा लगाइए कि प्रशासन और सरकार किस तरीके से नाकाम साबित हो रहा है. बाड़मेर में 10 लाख के करीब गौवंश है और अब तक मात्र 80 हजार गौवंश का ही सर्वे हो पाया है जो करीब 8% है.

सबसे बुरे हालात बाड़मेर जिले के बॉर्डर के गांव में है, जहां पर सरकार के सारे दावे पूरी तरीके से फेल हो चुके हैं. न तो कोई इलाज पहुंच पा रहा है और न ही सरकार की टीमें बॉर्डर के सुदूर गांवों में पहुंच रही हैं. यह हालात हैं कि दिनों दिन गौवंश के मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और सरकार के दावे फेल नजर आ रहे हैं. 

 

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