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गाय के गोबर से बनाईं राखियां, अमेरिका से भी ऑर्डर, जानें इसकी खासियत

गुजरात के जूनागढ़ में महिलाओं का एक समूह बीते पांच साल से गाय के गोबर से राखियां बना रहा है. पहले ये महिलाएं रक्षाबंधन पर जहां 500 राखियां बनाती थीं, वहीं इस बार 20 हजार राखियां तैयार की हैं. गाय के गोबर से बनी राखियों के लिए यूएसए तक से ऑर्डर मिला है.

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गाय के गोबर से राखी बनातीं महिलाएं. (Photo: Aajtak) गाय के गोबर से राखी बनातीं महिलाएं. (Photo: Aajtak)

Gujarat News: रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार के लिए गुजरात के जूनागढ़ में गाय के गोबर से राखियां बनाई जा रही हैं. ये राखियां महिलाओं का एक समूह तैयार करता है. महिलाएं ये काम बीते पांच साल से कर रही हैं.

उनका कहना है कि कोरोना के बाद गोबर की राखियों की मांग बढ़ी है. पहले करीब 500 राखियां बनाती थीं, वहीं इस बार मांग के चलते करीब 20 हजार राखियां बनाई हैं. महिलाओं का कहना है कि इस बार देश के साथ विदेश से भी ऑर्डर मिला है.

गाय के गोबर से राखी बनातीं महिलाएं. (Photo: Aajtak)

गुजरात के जूनागढ़ जिले के कोयली गांव में गोपी मंडल की महिलाएं मिलकर गोबर से राखियों का निर्माण कर रही हैं. इसमें गोबर के साथ गौमूत्र और हल्दी का मिश्रण तैयार किया जाता है. भावना बेन इस राखी के बारे में कहती हैं कि गोबर की राखी पर्यावरण के लिए भी बेहतर है. उनका कहना है कि गाय के गोबर के साथ हल्दी एक एंटीबायोटिक के रूप में हम इसमें डालते हैं, ताकि गोबर और हल्दी वाली राखी स्वस्थ रखे.

इस बार विदेश से मिला गोबर की राखियों को ऑर्डर

गाय के गोबर से राखी बनातीं महिलाएं. (Photo: Aajtak)

सुंदर कलात्मक तरीके से बनाए गईं ये राखियां मन तो लुभाती हैं. पांच साल से गोबर से राखियां बना रहीं भावना बेन और उनकी साथी महिला हिना बेन कहती हैं कि पहले 200 से 500 राखियां बनाते थे, लेकिन कोरोना के बाद गोबर की राखियों की मांग काफी बढ़ी है. इस साल देश-विदेश से खास ऑर्डर मिला है. हमने इस बार 17 हजार से 20 हजार तक राखियां बनाई हैं.

प्रधानमंत्री मोदी को भी भेज चुकी हैं गोबर से बनी राखी

भावना बेन का कहना है कि पर्यावरण के लिहाज से ये राखियां मुफीद हैं. गांधीनगर के एक स्कूल ने इस राखी के लिए खासतौर पर ऑर्डर दिया गया है. कोराेना के समय पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विजय रूपाणी तक को ये गोबर की राखी भेजी गई थी.

बीते तीन महीने से कर रहीं राखियां बनाने का काम

गाय के गोबर से राखी बनातीं महिलाएं. (Photo: Aajtak)

ये सभी महिलाएं पिछले तीन महीने से राखियों का निर्माण कर रही थीं. सात महिलाओं ने मिलकर इस बार रक्षाबंधन को लेकर करीब 20 हजार राखियां तैयार की हैं. राखी बनाने का काम कर रही महिलाओं को साढ़े सात हजार रुपए प्रति माह मिलते हैं. यह काम तीन महीने तक चलता है.

एग्जीबिशन में प्रदर्शित करती हैं प्रोडक्ट

राज्य सरकार के सहयोग से महिलाओं ने एक समूह बना रखा है, जिसके अंतर्गत ये सभी मिलकर अपने प्रोडक्ट तैयार करती हैं. समय-समय पर लगने वाली एग्जीबिशन में भी प्रदर्शित करती हैं. गोबर से बनी ये राखियां दस रुपए से लेकर 30 रुपए तक की कीमत वाली हैं.

गुजरात में एक एग्जीबिशन में इन गोबर की राखियों को अमेरिका से आए कुछ लोगों ने देखा तो उन्हें राखियां पसंद आईं. इस पर यूएसए के एक एनजीओ से राखियों के लिए 893 डॉलर का आर्डर दे दिया है. इस पर महिलाओं ने सात हजार राखियां अमेरिका भेजी हैं.

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