विजयदशमी के मौके पर रावण के पुतले का दहन हो गया. उसके बाद बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न भी मना लिया गया और रस्म पूरी हो गई. मगर उनका क्या करें जो ढोंग और पाखंड के सबसे बड़े रावण हैं. जो हर रोज अपनी बुराई से अच्छाई को कुचल रहे हैं. जो हर पल भगवान और भक्त के बीच की आस्था को चकनाचूर कर रहे हैं.